संविधान के मूल तत्वों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं, 2019 में नए भारत का खाका खीचेंगे

संविधान के मूल तत्वों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं, 2019 में नए भारत का खाका खीचेंगे

संविधान यात्रा 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जी को जिंदाबाद कहते हुए बाबासाहेब अंबेडकर को सलाम कर कल पंजाब में भगत सिंह जी के पैतृक मकान खटकड़ कलां में प्रेरणा लेने पहुंची। प्रोफेसर जगमोहन ने कहा कि भगत सिंह ने गांधी के काम को ही आगे बढ़ाया है जब हम शिवा का काम करते हैं और लोगों के बीच जाते हैं तो हमारी दृष्टि अपने आप साफ हो जाती है चाहे गांधी हो भगत सिंह हो या गदर पार्टी के नेता, जमीनी बात सब एक ही कहते हैं कि मजहब के नाम पर नहीं, लोगों की जरूरतों को समझते हुए उनके लिए काम करना चाहिए।

कल शाम को पंजाब विश्वविद्यालय में विभिन्न जन संगठनों ने संविधान सम्मान यात्रा का जोरदार स्वागत किया यात्रा के तमाम अलग-अलग आंदोलनों से आए साथियों ने अपनी बात रखी और पंजाब के सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने यात्रा का समर्थन करते हुए अपनी बातें रखी। यात्रा का स्वागत में इनायत सिंह कक्कड़ ने सभा को संबोधित किया और संविधान पर बढ़ते हमले की निंदा की।

सभा का आरंभ करते हुए समाजशास्त्र के प्रोफेसर मनजीत सिंह जी ने कहा कि जब देश अनेक समस्याओं से घिरा है तब सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म करने में लगी है। जिन्होंने संविधान को अंगीकार किया अब उन्हीं पर संविधान के संरक्षण की जिम्मेदारी है मैं समन्वय की यात्रा का अभिनंदन करता हूं।

समन्वय के साथी संजय मंगला गोपाल ने कहा की समन्वय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए ही बनाया गया था आज अभिव्यक्ति का ही विरोध हो रहा है हम मानते हैं संविधान खतरे में नहीं है संविधान को खतरे में डालने वाले लोग खतरे में हैं। यह सत्ता जरूर बदलेगी, मगर हमारा संघर्ष उसके बाद भी चालू रहेगा क्योंकि समन्वय जनता की हकों, पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े आंदोलनों का साथ देता है उनको साथ लेकर चलता है। हम मिलकर लड़ने में विश्वास रखते हैं संविधान हमारा संबल है।

दिल्ली के कंझावला में किसानों की लड़ाई लड़ने वाले और यात्रा में पूरा समय रहने वाले भूपेंद्र रावत ने कहा कि हमने यात्रा में पाया कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था नीचे गई है, वॉलमार्ट को लाने के लिए जीएसटी तुरंत लगाया गया, मंदसौर में अपना हक मांग रहे किसानों पर गोली चली, तो छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हमारी सभा को चुनावी आचार संहिता के कारण रोकने की कोशिश हुई, नर्मदा घाटी में लोग सरदार सरोवर बांध के सरकारी उद्घाटन के बाद भी अपने गांव में डटे हैं और पुरजोर लड़ाई लड़ रहे हैं, संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल लाने में नाकाम रही केंद्र सरकार ने राज्यों को खुली छूट दी कि वह अपने राज्यों में भूमि अधिग्रहण कानून में परिवर्तन कर सकते हैं, राजस्थान में स्वच्छ भारत के नाम पर महिलाओं की शौच करने पर वीडियो बनाने की गंदी हरकतें राजस्थान सरकार ने की, विरोध करने पर वहां के मुस्लिम वामपंथी नेता की हत्या तक कर दी गयी, विदेशी कंपनियों के लिए कानूनों में बदलाव, मजदूरों के हित वाले कानून कमतर किए जा रहे हैं। साथ में आरएसएस प्रमुख अपने हिंदूवादी एजेंडे को दिल्ली के विज्ञान भवन में बैठ कर आगे बढ़ाते हैं और कहते हैं कि उनको सब में हिंदू दिखता है। मगर देश का आम नागरिक इस भ्रम में नहीं है। हर जगह लोग मजबूती से संघर्ष कर रहे हैं।

अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन के साथी विजय ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि संसद के सामने संविधान जलाने वाले लोगों को संसद में बैठे सरकार का समर्थन है। किसान मजदूर विद्यार्थी बहुत परेशान हैं। नीतियां व कानून उनके खिलाफ, विद्यार्थियों की वजीफे कम करने और रोकने की तरीके हो रहे हैं।

AISA के साथियों ने यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि जो पंजाब आजादी और बराबरी की संघर्षों में आगे रहा है वहां की छात्राएं महिला अधिकार के लिए, लाइब्रेरी के लिए लड़ रही हैं।

जन स्वास्थ्य अभियान से प्यारे लाल जी ने कहा कि पंजाब में ग्राम सभा सिर्फ कागज पर होता है हम इसको सही करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी व आशा वर्करो की वेतन के लिए संघर्ष की बात रखी। हम गांव-गांव में संविधान के मूल्यों की बात करेंगे जो कि पंजाब के लिए एक परिस्तिथि बदलने जैसी बड़ी बात होगी।

सर्वहारा जन आन्दोलन की उल्का महाजन ने कहा कि संविधान हमारा आधार था हम मानते थे कि संविधान है। मगर आरएसएस ने 1949 में अपने मुखपत्र में यह साफ लिख दिया था कि वह इस संविधान को नहीं वरन मनुस्मृति को मानते हैं। आज सत्ता में आने के बाद वे इसे जमीन पर उतार रहे हैं दूसरी तरफ वास्तविक जमीन की लूट जारी है, 11 कॉरिडोर में लाखों-लाख वर्ग किलोमीटर जमीन जा रही है अमृतसर कोलकाता कॉरीडोर में 5,50,000 वर्ग किलोमीटर जमीन जा रही है। ग्रामीण रोजगार खत्म हो रहा है। इसकी भरपाई कैसे होगी ?

पीयूसीएल के युवा वकील अर्जुन ने कहा कि देश इस समय अघोषित आपातकाल से गुजर रहा है सरकार 5 लोगों के खड़े होने पर भी आपत्ति करती है। सुधा भारद्वाज जैसी समाज के लिए जीवन देने वाली महिला पर झूठे इल्जाम लगा के अंदर डाला है। मगर आवाज नहीं रुकेगी। UAPA  जैसे खतरनाक कानून का इस्तेमाल आवाजें दबाने के लिए किया जा रहा है। अगला नंबर किसी का भी हो सकता है।

पंजाब यूनिवर्सिटी की युवा छात्र अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा अधिकार थाली में परोस के नहीं मिलते हैं उसके लिए लड़ना पड़ता है तभी जीत मिलती है। हम छात्र फासीवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए कटिबद्ध हैं।

सीपीआई लिबरेशन से आये कमल ने कहा कि यह सरकार अराजक कदम उठा रही है लोगों की ताकत को दबाने की कोशिश कर रही है इनके गुंडे मुसलमान और दलितों को मार रहे हैं। भय का वातावरण बनाने की कोशिश है। इनके खिलाफ बोलने वाले हिंदुओं पर भी हमले चालू हैं। हमारी लड़ाई आरएसएस की नफरत के खिलाफ है। हम मजदूर किसान के हित के लिए निडर होकर काम करते ही रहेंगे।

स्वराज अभियान से वकील राजीव ने बोला कि 2003 में समन्वय की देश बचाओ देश बनाओ नाम से यात्रा आई थी। हमें इस बात की खुशी है कि समन्वय सांप्रदायिकता और पूंजीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। पंजाब का प्रबुद्ध वर्ग संविधान के मूल तत्व को बचाने की कोशिशों के लिए समन्वय के साथ है। संविधान में जनहित में सकारात्मक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है किंतु उसके मूल तत्वों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं। जो कि उसकी प्रस्तावना में लिखे गए हैं।

आतंकवाद में मारे गए दीपक धवन की बहन पंजाब विश्वविद्यालय की लाइब्रेरियन इंदु धवन ने अपनी कविता के माध्यम से कहा ऐसा समय हमने पहले भी देखा है मगर फिर भी लड़ने के लिए हम जिंदा हैं।

तेलंगाना की मीरा संघमित्रा ने पंजाब के लोगों को साथियों को जिंदाबाद करते हुए कहा कि हम यहां यात्रा के अंतिम दिनों में पहुंचे हैं। आंदोलनों की एकता संघर्ष को मजबूत करेगी, युवा साथी खासकर महिलाएं संघर्ष के नेतृत्व को संभाले। उन्होंने आवाहन किया कि 10 दिसंबर को यात्रा के पूरा होने के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र भी दिल्ली के संसद मार्ग पहुंचे।

गंगा यमुना घाटी में कार्यरत विमल भाई ने कहा कि हम 11 दिसंबर को जश्न मनाएंगे हाल ही के राज्यों में जुमलों की सरकार को गिराने का। 2019 में केंद्र की सांप्रदायिक सरकार को हटाकर पंजाब के, इसी मैदान में आकर मिलकर नए भारत का खाका बनाएंगे। जिसमें समता सादगी स्वावलंबन के आधार पर आम गरीब मेहनतकश की मांग सर्वोपरि होगी। कनुप्रिया जैसी पंजाब की बेटियों को जिंदाबाद, पंजाब के संघर्षों को, हरियाणा के संघर्षों को जिंदाबाद।

यात्रा ने इसके बाद छात्राओं के लिए हॉस्टल में समय की पाबंदी के खिलाफ और पुस्तकालय को पूरे समय खोले जाने के लिए चल रहे संघर्षों को धरना स्थल पर जाकर समर्थन दिया। इसके बाद यात्रा हिमाचल के लिए प्रस्थान हुई। अगले दिन मतलब आज यात्रा शिमला में जमीनी संघर्षों के साथ रूबरू होगी और यात्रा की दूसरी टीम जम्मू पहुंचेगी।

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