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संसद की कार्यवाही बाधित करने का सांसदों को कोई अधिकार नहीं: राष्ट्रपति

नई दिल्ली . पीएम मोदी ने 8 नवंबर को अचानक नोटबंदी की घोषणा करने के बाद से ही देश में कोहराम मचा हुआ है. संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पिछले 18 दिनों से चल रहे हंगामे पर अब राष्ट्र पति प्रणव मुखर्जी ने नाराज़गी जाहिर की है. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध को खत्मे करने की अपील करते हुए साफ-साफ कहा है कि संसद की कार्यवाही में बाधा किसी भी सूरत में स्वीरकार्य नहीं है.

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नेशनल दस्तक के अनुसार, आज डिफेंस एस्टेतट्स ऑर्गेनाइजेशन की एक बैठक के दौरान राष्ट्रसपति ने कहा, ‘बतौर सांसद डिबेट करना और असहमत होना आपका अधिकार है लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करने का आपका कोई अधिकार नहीं है. राष्ट्रपति ने ‘मजबूत लोकतंत्र के लिए सुधार’ पर डिफेंस एस्टेट लेक्चर में कहा कि जनता अपना प्रतिनिधि संसद में काम करने के लिए भेजती है, न कि हंगामा करने के लिए.

राष्ट्रपति ने कहा, “धरना किसी और जगह दिया जा सकता है.” नेताओं को संसद में धरना देने के लिए नहीं चुना जाता. भगवान के लिए, अपना काम कीजिए. आपका काम संसद की कार्यवाही को चालू रखना है.’ उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि संसदीय कामकाज में बाधा चलन सा हो गया है. उन्होंने सांसदों से सदन में लोक महत्व के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कहा.

मुखर्जी ने इसके साथ ही लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने की वकालत की. मुखर्जी ने कहा, ‘महिला आरक्षण विधेयक लंबे वक्त से पेडिंग है और असेंबली में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’
राष्ट्र पति ने आगे कहा, ‘मेरा मकसद किसी भी शख्सह को दोषी ठहराने का नहीं है लेकिन अब संसद की कार्यवाही बाधित करना प्रैक्टिस बन गया है. संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए संसदीय स्वातंत्रता का गलत इस्तेगमाल नहीं होना चाहिए.’

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