Tuesday , February 20 2018

सऊदी अरब को माफ़ी नहीं दे सकते: खुमैनी

“इस्लामी जम्हूरीया ईरान” के बानी खुमैनी ने एक मर्तबा 1987 में मक्का मुकर्रमा में पेश आने वाले वाक़ियात पर तबसरा करते हुए कहा था कि “बैतुल-मुक़द्दस से दस्तबरदार होना और सद्दाम हुसैन से मुसालहत हमारे लिए आसान तर है बनिसबत सऊदी अरब को माफ़ कर देने के”।

इस जुमले से ममलकत सऊदी अरब के हवाले से ईरान के मवाक़िफ़ वाज़ेह हो जाते हैं और ये हमें सऊदी अरब और ईरान के दरमयान ताल्लुक़ात की कशीदगी के पीछे छिपी वजूहात पर ग़ौर वि फ़िक्र की दावत देता है वो कशीदगी जो इन दिनों अपने उरूज पर पहुंची हुई है।

1986 में यानी कि खुमैनी की जानिब से (ज़रूरत पड़ने पर) “बैतुल-मुक़द्दस से दस्त बर्दारी” का इंदीया देने से एक साल क़ब्ल लेबनानी अख़बार अल शराअ ने “ईरान कोंट्रा” स्कैंडल से पर्दा उठा दिया था।

ये हथियारों की इस डील के जे़ल में था जो अमरीका और तेहरान के दरमयान इसराईली शिरकत के साथ तय पाई थी। इस से हासिल होने वाली आमदनी कोंट्रा बाग़ीयों को दी जाना थी। बादअज़ां आलमी मीडिया ने बताया था कि अमरीका और इसराईल के एक वफ्द ने खु़फ़ीया तौर पर 25 मई 1986 को तेहरान का दौरा किया था।

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