Wednesday , June 20 2018

सऊदी अरब में सुधार के नाम पर बदलाव पश्चिमी देशों के इशारे पर कर रहे हैं मोहम्मद बिन सलमान- एक्सपर्ट

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान जिस प्रकार से सुधार के घोड़े पर सवार, तेज़ रफ्तारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए बहुत से विश्लेषकों का कहना है कि मुसलमानों के लिए सब से अधिक पवित्र स्थल वाले देश सऊदी अरब में “सुधार” का अभियान, पश्चिम की ओर से मुहम्मद बिन सलमान को सौंपा गया है।

सऊदी अरब बड़ी मजबूरी की दशा में पश्चिम की इच्छा के अनुसार “उदारवाद” की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और इस रास्ते में आने वाली हर रुकावट को दूर कर रहा है।

इसके लिए सऊदी मीडिया भी पूरी तरह से सरकार के साथ नज़र आ रहा है और “रोटाना” और “अस्सऊदिया24” जैसे सेटेलाइट चैनल भी इसी उदारवाद का प्रचार करते नज़र आते हैं और इस के लिए यूएई को बेहतर आदर्श के रूप में पेश किया जा रहा है।

सुधार की इस आंधी में सभी धार्मिक संस्थाओं को एक एक करके खत्म किया जा रहा है और कुछ सूत्रों की मानें तो हालिया दिनों में जब सऊदी प्रिंस सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अमरीका की यात्रा पर गये थे तो अमरीका ने उनसे साफ साफ कह दिया था कि सऊदी अरब से “वहाबियत” का बोरिया बिस्तर लपेट दें।

अब यह बदले हालात नहीं तो और क्या हैं कि जिस सऊदी अरब में मुफ्ती फोटो खींचने और गुनगुनाने को भी धर्म के विरुद्ध मानते थे उसी सऊदी अरब में मिस्र की प्रसिद्ध गायिका “अनग़ाम” शो करने वाली हैं।

मिस्र की इस विख्यात गायिका ने ट्विट किया है कि मुझे अपने फैन्स को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ईद के अवसर पर विशेष कार्यक्रम में आप सब के मध्य रहूंगी।

यह पहली बार होगा कि जब सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में शो करेगी और गाना गाएगी। इसके साथ ही यह भी खबर आयी कि सऊदी अरब , महिलाओं की फुटबाल टीम भी बना रहा है।

देश में बदलते माहौल का असर इस देश में अत्याधिक प्रभावी समझे जाने वाले धर्मगुरुओं और मुफ्तियों पर हो रहा है और अब रमज़ान के महीने में रोज़ा रख कर मस्जिदों में नमाज़ पढ़ाना उन्हें काफी भारी लगने लगा है विशेष इस लिए भी कि सुन्नी समुदाय, रमज़ान से विशेष “तरावीह” की नमाज़ भी पढ़ता है जो काफी लंबी होती है।

इस लिए सऊदी अरब में मस्जिदों में नमाज़ पढ़ाने वाले धर्मगुरु, भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश के मौलवियों को अपने कुछ पैसे देकर अपनी जगह नमाज़ पढ़ाने भेज देते हैं जिस से स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है और लोगों का कहना है कि इस साल रमज़ान के महीने में सऊदी अरब की मस्जिदों में कम नमाज़ियों की एक वजह यह भी है।

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