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सचिन के क्रिकेट कैरीयर को तवालत में 9 वां मुक़ाम

कोलकाता, 16 नवंबर (आई ए एन ऐस) सचिन तनडोलकर ने इंटरनैशनल क्रिकेट में आज 22 तवील बरस मुकम्मल करलई, और अब वो टेसट क्रिकेट में तवील तरीन कैरीयरस के हामिल खिलाड़ियों की फ़हरिस्त में नौवीं मुक़ाम पर हैं। वो 15 नवंबर 1989-ए-का दिन था कि शर्मीले 16 साल

कोलकाता, 16 नवंबर (आई ए एन ऐस) सचिन तनडोलकर ने इंटरनैशनल क्रिकेट में आज 22 तवील बरस मुकम्मल करलई, और अब वो टेसट क्रिकेट में तवील तरीन कैरीयरस के हामिल खिलाड़ियों की फ़हरिस्त में नौवीं मुक़ाम पर हैं। वो 15 नवंबर 1989-ए-का दिन था कि शर्मीले 16 साला तनडोलकर ने हिंदूस्तान केलिए अपना कैरीयर कृष्णमाचारी सरिरकांत की क़ियादत में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ख़िलाफ़ कराची टेसट में शुरू किया था। और क्रिकेट पंडितों तब ही कह दिया था कि ये टेलैंट आने वाले बरसों में बैटिंग के तमाम रेकॉर्ड्स तोड़ने की क़ाबिलीयत का हामिल है। सचिन ने अपने ओ डी आई कैरीयर का आग़ाज़ भी वही टूर में गुजरांवाला में किया था, और फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

इंग्लिश ऑल राॶनडर विल्फ्रेड रोड्स यक्म जून 1899-ए-से 12 अप्रैल 1930-ए-तक 30 साल 315 दिन अपने मुल़्क की नुमाइंदगी का मुनफ़रद रिकार्ड रखते हैं। इंगलैंड के ही डेनिस बुराॶन क्लोज़ और फ्रैंक वोली तरतीबवार दूसरे और तीसरे मुक़ाम पर हैं। डेनिस ने टेसट क्रिकेट 26 साल 356 दिन खेली, जबकि फ्रैंक का कैरीयर 25 साल 13 यौम पर मुहीत है। इस फ़हरिस्त में तनडोलकर से आगे मौजूद दीगर खिलाड़ी जॉर्ज हीडले (वैस्ट इंडीज़), जान टराईकास (जुनूबी अफ़्रीक़ा और ज़िम्बाब्वे), जैक हॉब्स (इंगलैंड), जॉर्ज गुण (इंगलैंड) और सिड ग्रेगोरी (इंगलैंड) हैं। 183 टेसट मैं 15,124 रंज़ (वैस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ ईडन गार्डन्स में जारीया मैच की दूसरी इन्निंगज़ तक) और 453 ओ डी आईज़ मैं 18,111 रंज़ के साथ तनडोलकर दोनों फॉर्मटस में सब से ज़्यादा तादाद में मैचिज़ खेलने और सब से ज़्यादा रंज़ बनाने का रिकार्ड रखते हैं।

सब से ज़्यादा सैंचरियों (टेसट में 51 और ओ डी आईज़ में 48) का रिकार्ड भी उन के नाम दर्ज है।38 साल की उम्र में वो हनूज़ इंटरनैशनल क्रिकेट खेलने के मुआमले में टीम साथी राहुल डरावीड के बाद दूसरे ज़्यादा उम्र वाले हिंदूस्तानी खिलाड़ी हैं। ज़ाइद अज़ दो दहों से करोड़ों परसितारों की उमंगों की तकमील करते हुए तनडोलकर मलिक के एक अज़ीम स्टार के तौर पर उभरे हैं, हालाँकि उन्हें मुतअद्दिद इंजरीज़ पेश आएं जिस में कैरीयर केलिए ख़तरा बनने वाला कहनी का ज़ख़म शामिल है। तनडोलकर ने हमेशा मैदान पर और मैदान से बाहर ख़ुद को तनाज़आत से दूर रखा और जनटलमनस गेम को इस के हक़ीक़ी जज़बा में खेला है।

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