Monday , December 18 2017

सचिन 100 वें सेंचुएयरी के संग मेल को फ़रामोश कर दें

साबिक़ हिंदूस्तानी कप्तान रवी शास्त्री चाहते हैं कि सीनियर बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर अपने फ़ित्री खेल को पेश करें और 100 वीं इंटरनेशनल सेंचुएयरी के संग मेल को फ़रामोश कर दें।

साबिक़ हिंदूस्तानी कप्तान रवी शास्त्री चाहते हैं कि सीनियर बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर अपने फ़ित्री खेल को पेश करें और 100 वीं इंटरनेशनल सेंचुएयरी के संग मेल को फ़रामोश कर दें।

सचिन हनूज़ अपनी 100 वीं बैन अल-अक़वामी सेंचुएयरी की तलाश में हैं और इस संग मेल को उबूर करने में मुसलसल उन्हें नाकामियों का सामना करना पड़ रहा है । रवी शास्त्री ने इस ख़्याल से इत्तिफ़ाक़ नहीं किया कि सचिन फ़ार्म में नहीं हैं । उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई दौरा में सात इनिं‍ग्ज़ में 32 के औसत से रन बनाए हैं।

शास्त्री का कहना है कि सचिन को चाहीए कि वो बौलर्स के ख़िलाफ़ जारिहाना तीव्र इख्तेयार करें इसी में इन की कामयाबी है । शास्त्री का सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने ये कहते हुए हवाला दिया कि अगर सचिन तेंदुलकर सिर्फ़ तेज़ रफ़्तार बैटिंग पर तवज्जा दें संग मेल को फ़रामोश कर दें और बौलर्स के साथ मेरिट के मुताबिक़ सुलूक करें तो फिर वो एक बार फिर रन स्कोर करने लगेंगे ।

शास्त्री ने कहा कि मैलबोर्न और सिडनी टेस्ट मैच्स में सचिन तेंदुलकर ने अपनी तकनीक ( टेक्नीक़) में तबदीली लाई थी और बाआसानी वो निस्फ़ सेंचुएयरी स्कोर करने में कामयाब रहे थे ताहम सबाद में सूरत-ए-हाल के मुताबिक़ वो भी मुश्किलात का शिकार हो गए । शास्त्री ने कहा कि मैलबोर्न में जब खेल के आख़िरी दस मिनट बाक़ी थे सचिन बहुत ज़्यादा मुहतात हो गए थे और उनके खेल में तबदीली आ गई थी ।

जिस अंदाज़ से वो 70 रन बनाने तक खेल रहे थे वो बरक़रार नहीं रहा था और यहीं वो आउट हो गए । दीगर सूरत-ए-हाल में सचिन माईकल क्लार्क की गेंदबाज़ी का बाआसानी मुक़ाबला कर सकते हैं लेकिन सचिन उसका शिकार हो गए । जैसे जैसे वो सेंचुएयरी के करीब आ रहे हैं वो परेशान हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों ही टेस्टों में सचिन ने दोनों टीमों के बल्लेबाज़ों में बहतरीन बैटिंग की थी । ये सिर्फ उनके आउट होने की टाइमिंग का मसला है । वो मानते हैं कि जैसे जैसे सचिन तेंदुलकर 100 के हिन्दसे के करीब आते हैं वो ज़्यादा एहतियात बरतने की कोशिश करते हैं और मुख़्तलिफ़ अंदाज़ इख्तेयार कर लेते हैं जो उन की इनिंग्ज़ की शुरूआत से अलग होता है ।

अगर वो अपने इबतिदाई टैंपो को ही बरक़रार रखें और 100 के जादूई हिन्दसे को फ़रामोश कर दें तो वो उसे पार करने में कामयाब हो जायेगे । गुज़शता चंद महीनों से सचिन की 100 वीं सेंचुएयरी के लिए दिलचस्पी और बेचैनीयां बढ़ गई हैं। शास्त्री का कहना है कि हिंदूस्तान में इसके ताल्लुक़ से बहुत ज़्यादा उम्मीदें पाई जाती हैं की उनका ये ऐसा संग मेल है जिसे किसी और ने उबूर नहीं किया है ।

साबिक़ दौर में लोग फ़र्सट (First) क्लास क्रिकेट की 100 वीं सेंचुएयरी को ही बहुत बड़ी कामयाबी समझते थे लेकिन ये बैन अल-अक़वामी 100 वीं सेंचुएयरी है । ये कोई मज़ाक़ नहीं है । वो यक़ीन से नहीं कह सकते कि कोई दूसरा बल्लेबाज़ एक तवील वक़्त में भी इस कारनामा को अंजाम दे सकेगा। रवी शास्त्री ने कहा कि ये हो सकता कि इस ताल्लुक़ से उम्मीदें उन पर दबाव का सबब बन रही हो।

हिंदूस्तान हो के ऑस्ट्रेलिया सचिन जहां जाएं लोग उन की 100 वीं सेंचुएयरी के ताल्लुक़ से ही बात कर रहे हैं। और इंसान होने के नाते वो उसे अंदर से महसूस कर रहे होंगे चाहे वो उसे ज़ाहिर ना करें और इसका एतराफ़ ना करें लेकिन वो भी इंसान हैं और ऐसा हो सकता है।

TOPPOPULARRECENT