Monday , December 18 2017

सच्चा मुसलमान बनना है तो चीनी मुसलमानों से सीखें

श्रद्धालु हज करके वापस लौट रहे हैं | निंगझिया प्रांत के सुदूर कस्बे, तोंगझीन की शाही मस्जिद के बाहर नमाज़ का इंतज़ार करते हुए बैठे ली युचुआन कहते हैं कि “यह तीर्थयात्रा हमारी आज़ादी है | हमारी नमाज़ इसके लिए एक तय्यारी है |” उनके साथ बैठे उनके मित्र कहते हैं कि हम मुस्लमान पांच वक़्त की नमाज़ पढ़ते हैं | हम लचीले और मज़बूत हैं जैसा कि चीन के मुसलमानों को होना चाहिए |
चीन अपनी धार्मिक असहिष्णुता के लिए जाना जाता है | तिब्बत में बौद्ध, झिंजियांग प्रान्त में मुस्लिम और झेजियांग प्रांत के तटीये क्षेत्रों में ईसाईयों को अक्सर प्रताड़ित और गिरफ्तार किया जाता रहता है साथ इनके प्रार्थना स्थलों में भी तोड़फोड़ होती रहती है |
झिंजियांग में सरकार को इस्लाम आतंकवाद के समान लगता है| वहां महिलाओं को उनके चेहरे पर पर्दा नहीं पहनने के लिए आदेश दिया गया है| सरकारी पदों में मुसलमानों को रमजान उपवास तोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है| लेकिन दमन की इस भयावह तस्वीर के बीच हुई मुस्लिम समुदाय एक अपवाद है|

चीन में दो बड़े मुस्लिम समूह हैं; झिंजियांग के उइघुर और कम परिचित हुई समुदाय | इन दोनों समूहों की आबादी लगभग 10-10 मिलियन है | चीन की आबादी की तुलना में इनकी आबादी सागर में बूँद जैसी है | लेकिन दोनों समुदाय के हालात में बहुत फर्क है| उइघुर मुसलमान पीड़ित हैं जबकि हुई संपन्नता की तरफ अग्रसर हैं|

नार्थन नेशनालिटिज़ यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत प्रोफेसर मा पिंग बताते हैं कि निंगझिया प्रांत (हुई समुदाय की आबादी वाला क्षेत्र) में 1958 से अब तक मस्जिदों की तादाद लगभग दुगनी हो गयी है | पहले यहाँ मस्जिदों की संख्या लगभग 1900 थी जो अब 4000 हो चुकी है और बढ़ रही है | हुई आर्थिक रूप से सफल हैं| वे शायद ही कभी इस्लामोफोबिया के शिकार हुए हैं| दुनिया में सिर्फ कुछ मुस्लिम अल्पसंख्यकों समुदाय ही ऐसा कह सकते हैं कि वह इस्लामोफोबिया का शिकार नहीं है |

हुई समुदाय की धार्मिक प्रथाएं इस्लाम धर्म के चीन पर प्रभाव को दर्शाती हैं | एक हुई विद्वान, मा तोंग के मुताबिक हुई की लगभग आधी आबादी सुन्नी-हनफी मसलक को मानती है जो चीन में सदियों पहले आया था | हुई की आबादी का पांचवा हिस्सा वहाबिस्म को मानता है जो यहाँ 19 शताब्दी में फैला | इसके अलावा यहाँ तीन सूफी मतों के मानने वाले भी हैं जिनको सल्फियों द्वारा धर्म भ्रष्ट माना जाता है | हुई की धार्मिक विविधता ही चीन सरकार के लिए उन्हें बर्दाश्त करना आसान बनाती है| उनकी इस विविधता का फायदा उठा कर सरकार फूट डालो शासन करो की नीति के ज़रिये इन पर अपना नियंत्रण बनाये रख सकती है |

लेकिन हुई की सफलता का असली रहस्य उनके और उइघुर के बीच विविधताओं में निहित है | उइघुर, तुर्की मूल के हैं और जातीय रूप से अलग हैं | वे अपनी भाषा बोलते हैं जो तुकी और उज़्बेक से संबंधित है | उनका बहुमत झिंजियांग में रहता है | भेदभाव की एक दीवार उन्हें हान चीनी समुदाय से अलग करती है | अगर उन्हें राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों में काम मिलता है तब वह निचले स्तर का होता है |

इसके विपरीत, हुई समुदाय को एक जातीय अल्पसंख्यक के रूप में गिना जाता है क्योंकि यह केवल उनके घरेलू पंजीकरण दस्तावेजों लिखा गया है | हुई समुदाय के पूर्वज सदियों पूर्व यहाँ मिशनरियों और व्यापारियों के रूप में फारस, मंगोल या दक्षिण-पूर्व एशिया से आये थे | पीढ़ियों के लिए हान के साथ विवाह करने के बाद, वे चीनी बोलते हैं और चीनी दिखते हैं | वे चीन में फैले हुए हैं; उनकी आबादी का केवल एक पांचवें हिस्सा ही निंगझिया में रहते हैं | उइघुर और तिब्बतियों के विपरीत, उन्होंने हान समुदाय के साथ आत्मसात होने का पथ चुना |

चीनी समाज के साथ एक निकट संबंध हुई की विशेषता है | सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक लोगों में से कुछ हुई थे, हालांकि कुछ चीनी ही इसके बारे में जानते हैं। वे झेंग जो चीन के कोलंबस के बराबर है, उन्होंने 1400 के आसपास कई खोजी यात्राओं का नेतृत्व किया | हाल ही में जिआंगसु प्रांत में पार्टी प्रमुख और जातीय मामलों के आयोग, एक सरकारी विभाग के प्रमुख हुई थे |

हान के साथ हुई के संबंध हमेशा अच्छे नहीं रहे हैं | 1860 के दशक और 1870 के दशक में हुई द्वारा तथाकथित दुनगन विद्रोह बेहद खूनखराबे भरा था | लेकिन 1976 में माओ की मौत के बाद से दोनों पक्ष एक सुलह के स्तर पर पहुंच गये हैं | Dru Gladney, कैलिफोर्निया में पोमोना कॉलेज की डरु ग्लादने कहती हैं कि हुई की एक बानगी चीन की राजनीतिक व्यवस्था के ग्रे क्षेत्रों में बातचीत का कौशल है |

उनके बातचीत के इस कौशल की बदोलत ही वे आर्थिक रूप से सफल हैं | वे हलाल खाद्य उत्पादन के व्यापार पर हावी है | वे मध्य एशिया और खाड़ी के देशों में चीन के राज्य उद्यमों और कंपनियों के बीच बिचौलियों के रूप में उभर रहे हैं | यिनचुआन के बाहरी इलाके में स्थित चीन का सबसे बड़ा अरबी स्कूल एक निजी कॉलेज है, इसकी स्थापना हुई ने की और वे आंशिक रूप से इसका वित्त पोषण भी कर रहे हैं | अधिकांश छात्र यहाँ कॉर्पोरेट द्विभाषियों बनने के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं |

सरकार द्वारा हुई को बर्दाश्त करने का एक संकेत यह भी है कि वे एक सीमित हद तक इस्लामी क़ानून शरियत का अभ्यास भी कर सकते हैं | हालाँकि चीनी कानून कोड शरियत को मान्यता नहीं देता | फिर भी नाजिअहू मस्जिद में, स्थानीय काउंटी कोर्ट और अहोंग (इमाम) एक ही मध्यस्था कार्यालय का इस्तेमाल करते हैं | हर हफ्ते, अहोंग शरियत का इस्तेमाल कर पारिवारिक विवादों का निपटारा करता है | सिविल अधिकारी तभी मध्यस्था करते हैं जब अहोंग विफल रहता है |

हैरानी की बात है कि दशकों तक आत्मसात होने के बावजूद हुई ने अपना या पहचान नहीं खोया है | सेवानिवृत प्रोफेसर श्री मा का कहना है कि “हुई अक्सर गूढ़-संबंधों वाले समुदाय बनाते हैं और एक जैसे पेशे भी अपनाते हैं | कई शहरों में रेस्टोरेंट और टैक्सीयों का परिचालन हुई द्वारा ही किया जाता है | लेकिन उनके आपसी मेलजोल का सबसे बड़ा कारण उनका धर्म ही है |” हुई एक बेहद उत्कृष्ट संतुलन बनाये रहते हैं | सदियों तक आत्मसात होने के कारण ही आज वह अपने धर्म का पालन बिना किसी बाधा के कर सकते हैं | लेकिन फिर भी उनका धर्म उन्हें अलग बनाये रखता है |

यह एक ऐसी लाइन है जिसका मतलब है कि हुई समुदाय चीन के बदलते रहने वाले धार्मिक नजरिये का शिकार होने से पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं है | वे अब तक इस्लामोफोबिया से बचे हुए हैं | लेकिन सोशल मीडिया के दौर में कट्टरता बढती जा रही है | हरा रंग (इस्लाम का एक महतवपूर्ण रंग ) को इन्टरनेट पर एक गाली जैसा बना दिया है | अब तक सरकार ने हुई की संस्कृति को बर्दाश्त किया है | लेकिन जुलाई में निंगझिया में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने दर्शकों से कहा कि “अवैध घुसपैठ की के खिलाफ सख्ती बरती जाए|” हालाँकि वहां घुसपैठ के कोई निशान नहीं हैं | शी जिनपिंग की सरकार कई धार्मिक समूहों के खिलाफ दमनकारी हो गयी है | अगला धार्मिक समूह हुई भी हो सकते हैं |

लेकिन हुई के अनुभवों की पेशकश काफी हद तक एक सकारात्मक सबक है | इस्लाम, जैसा हुई प्रदर्शित करते हैं, वह खतरा नहीं है जिसकी बात पार्टी के नेता कभी कभी करते हैं | हुई बताते हैं कि आप चीनी और मुस्लिम दोनों हो सकते हैं | यिनचुआन हवाई अड्डे पर हज से लौटा एक यात्री अपने सामान का इंतज़ार कर रहा है | उसने एक सफ़ेद कपड़ा पहना है | उस कपड़े पर हरे रंग में अरबी के शब्दों में लिखा है मक्का का चीनी तीर्थयात्री | इसके नीचे लाल झंडा बना है जो एक नास्तिक पार्टी के राज्य का प्रतीक है |

मूल लेख इकनोमिक टाइम से लिया गया है जिसका अनुवाद सिआसत के लिए जाकिर रियाज़ ने किया है

TOPPOPULARRECENT