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सज़ाए मौत से क़बल मुजरिम की अरकान ख़ानदान से मुलाक़ात यक़ीनी बनाने जद्द-ओ-जहद

कश्मीर17 अप्रैल ( पी टी आई ) सज़ाए मौत पर अचानक अमलावरी के सदमे का हनूज़ शिकार अफ़ज़ल गुरु के अरकाने ख़ानदान सुप्रीम कोर्ट से रुजू होने का मंसूबा बनारहे हैं ता कि सज़ाए मौत याफ़ता किसी भी मुजरिम के अरकान ख़ानदान उसे फांसी पर लटकाए जाने से

कश्मीर17 अप्रैल ( पी टी आई ) सज़ाए मौत पर अचानक अमलावरी के सदमे का हनूज़ शिकार अफ़ज़ल गुरु के अरकाने ख़ानदान सुप्रीम कोर्ट से रुजू होने का मंसूबा बनारहे हैं ता कि सज़ाए मौत याफ़ता किसी भी मुजरिम के अरकान ख़ानदान उसे फांसी पर लटकाए जाने से क़बल मुलाक़ात के हक़ से महरूम ना किए जा सके ।

अफ़ज़ल गुरु की बीवी ,फ़र्ज़ंद और दीगर अरकान ख़ानदान को अफ़ज़ल गुरु की फांसी की ख़बर अख़बारात के ज़रीये आम होने के बाद ही इस का इल्म‌ हुआ था । दिल्ली के तिहाड़ में के ओहदेदारों ने एक मकतूब के ज़रीये उन्हें उसकी इत्तिला दी थी लेकिन अफ़ज़ल गुरु को फांसी पर लटकाने के 51 घंटे बाद उन्हें ये मकतूब हवाला किया गया था जिस पर पूरी वादी कश्मीर में ब्रहमी की लहर दौड़ गई थी ।

चीफ़ जस्टिस आफ़ इंडिया अल्तमिश कबीर ने गुज़िशता हफ़्ते कहा था कि सज़ाए मौत याफ़ता मुजरिमों के अरकान ख़ानदान को सज़ा पर अमल आवरी से पहले उस की इत्तिला पहुंचा दी जानी चाहीए । इस तबसेरा का नोट लेते हुए अफ़ज़ल गुरु का ख़ानदान चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट इस सिलसिले में अज़ ख़ुद कार्रवाई करें और अगर सुप्रीम कोर्ट ऐसा करने से क़ासिर रहे तो उनका मंसूबा है कि इस बात को यक़ीनी बनाने केलिए कि किसी भी सज़ाए मौत याफ़ता मुजरिम के अरकान ख़ानदान उसकी सज़ा पर अमलावरी से क़बल इस से मुलाक़ात को यक़ीनी बनाने के हक़ से महरूम ना रह सकें , इस केलिए वो सुप्रीम कोर्ट से रुजू होंगे।

जब अफ़ज़ल गुरु की सज़ाए मौत की ताख़ीर से इत्तिला का तनाज़ा उरूज पर था तो मुबय्यना तौर पर वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला सुशील कुमार शिंदे को तलब कर के इस सिलसिले में नाराज़गी ज़ाहिर की थी।अफ़ज़ल गुरु की फांसी के दो माह बाद इनका ख़ानदान अपनी ज़िंदगी का अज़ सर-ए-नौ आग़ाज़ कररहा है । अफ़ज़ल गुरु की बीवी तबस्सुम मुक़ामी हस्पताल में अपने काम पर रुजू होचुकी हैं ।

अफ़ज़ल गुरु के ख़ानदान के अक्सर अरकान ने इस सिलसिला में ख़ामोशी इख़तियार कर रखी है और इस बारे में कोई तबसरा करने से इनकार कर दिया है ।अफ़ज़ल गुरु के भाई एजाज़ गुरु ने इज़हार हैरत करते हुए कहा कि सियासतदां और अलहिदगी पसंद अब शोर-ओ-गुल कररहे हैं लेकिन इन में से किसी ने गुज़िशता 12 साल के दौरान अफ़ज़ल गुरु केलिए कुछ भी नहीं किया था ।

उन्होंने कहा कि उनके भाई को कभी भी मुनासिब अदालती कार्रवाई केलिए मदद नहीं मिली ,कोई भी वकील इनका मुक़द्दमे लड़ने तैय्यार नहीं था । उन्होंने कहा कि हमारा किसी के साथ लेना देना नहीं है । असल धारे काकोई अलहिदगी पसंद हमारी मदद केलिए नहीं आया। हमको तन्हा छोड़ दिया गया था और अब भी हम तन्हाई का ही शिकार हैं ।

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