“सत्ता को खतरे में महसूस करने के कारण जेएनयू को ख़त्म किया जा रहा है”

“सत्ता को खतरे में महसूस करने के कारण जेएनयू को ख़त्म किया जा रहा है”

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व शिक्षाविदों में से एक और महान इतिहासकार 86 वर्षीय रोमिला थापर ने गोपालास्वामी पार्थसारथी के जीवन पर आधारित जीपी 1912-1995 शीर्षक वाली किताब के विमोचन समारोह में एक बड़ा बयान दिया है, थापर के अनुसार जेएनयू यूनिवर्सिटी को धीरे-धीरे ख़त्म किया जा रहा है, छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने का काम जेएनयू में बड़े स्तर पर हो रहा है. थापर ने कहा कि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति गोपालास्वामी पार्थसारथी ने कई अन्य शिक्षाविदों के साथ मिलकर सावधानीपूर्वक देखभाल से संस्थान को खड़ा करने में मदद की. थापर ने कहा कि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति गोपालास्वामी पार्थसारथी ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर सावधानीपूर्वक देखभाल से संस्थान को खड़ा करने में मदद की. थापर का कहना है कि “जेएनयू की स्थापना के वक्त इससे जुड़ने वाले शिक्षाविदों में थापर भी थीं. उन्होंने कहा कि बहस की स्वतंत्रता न देना और केवल आधिकारिक विचारों को महत्व देना, इस बात की ओर इशारा है कि जो सत्ता में हैं कहीं न कहीं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.”

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