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सदर ज़रदारी के दौर में पहली फांसी

हस्सास इदारे के मुलाज़िम को दौरान डयूटी अपने साथी को कत्ल करने के इल्ज़ाम में फांसी दे दी गई। साहीवाल के रिहायशी मुहम्मद हुसैन जो हस्सास इदारे का मुलाज़िम था, इस ने 2008-में दौरान डयूटी मामूली तल्ख़ कलामी पर अपने साथी ख़ादिम हुसैन क

हस्सास इदारे के मुलाज़िम को दौरान डयूटी अपने साथी को कत्ल करने के इल्ज़ाम में फांसी दे दी गई। साहीवाल के रिहायशी मुहम्मद हुसैन जो हस्सास इदारे का मुलाज़िम था, इस ने 2008-में दौरान डयूटी मामूली तल्ख़ कलामी पर अपने साथी ख़ादिम हुसैन को फायरिंग कर के कत्ल कर दिया था,

जिस पर उस को गिरफ़्तार कर के कोर्ट मार्शल कर दिया गया और उसे मिल्ट्री कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई थी । इस सज़ा पर रहम की अपील को भी सदर-ए-पाकिस्तान ने मुस्तर्द कर दिया था।

इस सज़ा के पेशे नज़र जुमेरात की सुबह 4 बजे सैंटर्ल जेल मियांवाली में उसे फांसी दे दी गई। लाश को पोरसट मार्टम के बाद विरसा के हवाले कर दिया गया।

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