Saturday , December 16 2017

सदर नशीन रियासती अक़लीयती कमीशन और अमला चार माह से तनख़्वाहों से महरूम

मर्कज़ी और रियासती हुकूमतों ने मुसलमानों के साथ हमेशा खिलवाड़ किया है । हमारे मुल्क बिलख़सूस रियासत में मुसलमानों से मुताल्लिक़ सरकारी मह्कमाजात उन में काम कर रहे ओहदेदारों , कमीशनों और उन कमीशनों के सदूर की कोई अहमियत नहीं है

मर्कज़ी और रियासती हुकूमतों ने मुसलमानों के साथ हमेशा खिलवाड़ किया है । हमारे मुल्क बिलख़सूस रियासत में मुसलमानों से मुताल्लिक़ सरकारी मह्कमाजात उन में काम कर रहे ओहदेदारों , कमीशनों और उन कमीशनों के सदूर की कोई अहमियत नहीं है ।

हद तो ये है कि हुक्मराँ जमात से वाबस्ता अक़लीयती क़ाइदीन को बुरी तरह नज़र अंदाज किया जाता है ये तास्सुर देने की कोशिश की जाती है कि हमारी पार्टी उन लोगों के लिए रोज़गार का ज़रीया है ।

रियासती अक़लीयती कमीशन के बारे में जानते हैं । इस इदारा का क़ियाम रियासत में अक़लीयतों के मुफ़ादात के लिए अमल में आया था । लेकिन अवाम अच्छी तरह जानते हैं कि हुकूमतों ने हमेशा रियासती अक़लीयती कमीशन को क़ानूनी इख़्तयारात हासिल होने के बावजूद बेबस और मजबूर रखा और इस का जो भी सदर नशीन मुक़र्रर हुआ उसे अक़लीयती मसाइल उठाने और उन्हें हल करने से रोका गया।

रियासती अक़लीयती कमीशन के बारे में भी ओहदेदारों का यही मुतासिबाना रवैया हो तो इस पर जितना अफ़सोस किया जाये कम है एक ऐसा इदारा जो अक़लीयतों के हुक़ूक़ के तहफ़्फ़ुज़ को यक़िनी बनाने के लिए क़ायम किया गया इस इदारा के मुफ़ादात को नुक़्सान पहुंचाया जाता है तो इस से बढ़ कर हमारी जम्हूरियत की बदक़िस्मती क्या होगी ।

आप को ये जान कर हैरत होगी कि गुज़िश्ता चार माह से रियासती अक़लीयती कमीशन के सदर नशीन और दीगर अरकान के इलावा दफ़्तरी अमला तनख़्वाहों से महरूम है ।

इस के इलावा सदर नशीन रियासती अक़लीयती कमीशन आबिद रसूल ख़ान को काबीनी दर्जा दीए जाने के बावजूद सरकारी गाड़ी और सेक्यूरिटी तक फ़राहम नहीं की गई । उन्हें अपनी तनख़्वाह की फ़िक्र नहीं है बल्कि कमीशन में काम करने वाले अमला की फ़िक्र है अमला में हाईकोर्ट के एक रीटायर्ड जज ओ एस डी की हैसियत से काम करते हैं लेकिन वो भी तनख़्वाह से महरूम रखे गए हैं ।

वाज़ेह रहे कि आबिद रसूल ख़ान को रियासती अक़लीयती कमीशन का सदर बनाए जाने से क़ब्ल वो प्रदेश कांग्रेस के जेनरल सेक्रेट्री और तर्जुमान के ओहदा पर फ़ाइज़ थे और बाज़ाब्ता तौर पर 2×2 की सेक्यूरिटी फ़राहम की गई थी लेकिन अब काबीनी दर्जा दीए जाने के बावजूद सेक्यूरिटी फ़राहम नहीं की गई ।

इस बारे में वो कहते हैं कि ये सब कुछ मुफ़ादात हासिला की साज़िशों का नतीजा है लेकिन वो इन तमाम को बेनकाब कर के रहेंगे । उन्हों ने मज़ीद कहा कि उनका 3 साल के लिए तक़र्रुर अमल में आया और वो अक़लीयतों के मसाइल हल करने हत्तल मक़्दूर कोशिश कर रहे हैं।

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