Thursday , December 14 2017

सदियों बाद फिर शुरू हुआ नालंदा यूनिवर्सिटी

क़दीम नालंदा यूनिवर्सिटी 821 साल बाद पीर को ज़िंदा हो उठा। जेरे तामीर नालंदा इंटेरनेशनल यूनिवर्सिटी में दो सबजेक्ट के सेशन के साथ ही न सिर्फ बिहार और भारत बल्कि पूरी दुनिया का ख्वाब साकार हो गया। हालांकि इस यूनिवर्सिटी का इफ़्तिताह 14

क़दीम नालंदा यूनिवर्सिटी 821 साल बाद पीर को ज़िंदा हो उठा। जेरे तामीर नालंदा इंटेरनेशनल यूनिवर्सिटी में दो सबजेक्ट के सेशन के साथ ही न सिर्फ बिहार और भारत बल्कि पूरी दुनिया का ख्वाब साकार हो गया। हालांकि इस यूनिवर्सिटी का इफ़्तिताह 14 सितंबर को होना है। उस दिन मरकज़ी वजीरे खारजा सुषमा स्वराज समेत क़ौमी और इंटेरनेशनल के तालीम प्रोफेससर के हिस्सा लेने की इमकान है।

जेरे कायम नालंदा यूनिवर्सिटी में पीर को ठीक साढ़े ग्यारह बज रहे थे। मुकाम, पहले बौद्ध संगिति मुकाम सप्तपर्णी गुहा के सामने बने इंटेरनेशनल कंवेन्शन सेंटर का तीस सीटों वाला सीटर कांफ्रेंस हॉल। यहां बैठे थे नालंदा इंटेरनेशनल यूनिवर्सिटी के नामजद दोनों सबजेक्ट के कुल 15 में से आठ तालिबे इल्म ।

साथ में थे मुंतख्बि दस में सात प्रोफेससर। इनका कियादत कर रही थीं कुलपति डॉ. गोपा सभरवाल और डीन डॉ. अंजना शर्मा। तमाम के चेहरों पर कुछ अजीब-सी रौनक, अमन और सुकून। मानों सबकी ख्वाहिशें पूरी हो गई।

डीन डॉ. शर्मा अपने खिताब में कहती हैं-हम आपस में एक-दूसरे को कई दिनों से जान रहे हैं, लेकिन सेशन के पहले दिन की शुरुआत हम क्यों न तारुफ़ से करें। और, उनके ठीक ओपोजीट की कुर्सी पर बैठी कोलकाता की तालिबा साना स्लाह अपना तारूफ़ देती है। वह महुलियात साइंस की तालिबा हैं।

उसकी दायीं ओर बैठी पटना की लूबना खान जो हिस्टरी की तालिबा है, उनके बाद जापान का अतिरनोकामोरा और कर्नाटक के डैनियल जो कि मौसम साइंस के तालिबे इल्म हैं और दीगर ने अंग्रेजी में अपना तरर्फ़ु दिया।

तररूफ़ के बाद तमाम तालिबे इल्म और प्रोफेससर मीडिया से रूबरू हुए। करीब 40 मिनट बाद फिर उसी हॉल में लौटे तालिबे इल्म और प्रोफेससर। सबसे पहले बहस की गयी शुरू किये जा रहे दोनों मौजू हिस्टरी और मौसम साइंस के सिलेबस पर। करीब दो घंटे तक चली क्लास में 16 मुल्कों के दानिश्वरों की मदद से बनाये गये दोनों मुजमीन के आलमी निसाब की संजीदगी और ज्वाज पर बहस की गयी

मंगल से दोनों सबजेक्ट के तालिबे इल्म की अलग-अलग क्लास लगेगी। रोजाना चार से पांच क्लास चलेंगी। कुलपति डॉ. सभरवाल ने कहा कि आज का दिन न सिर्फ मेरे, तालिबे इल्म और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों, बल्कि पूरे भारत और दुनिया के लिए अहम लम्हा है। सवा आठ सदी बाद फिर से नालंदा ज़िंदा हो उठा।

खुशी के मारे लाल हुईं डीन डॉ. शर्मा ने कहा कि जीत का दूसरा नाम नालंदा है। नालंदा नाम से ही दुश्मनी खत्म हो जाता है। हम यूनिवर्सिटी के जरिये इसे बमानी करेंगे। जो भी तालिबे इल्म यहां से पढ़कर बाहर निकलेंगे, अपने शोबे में मुंफर्द इल्म के साथ ही दुनिया को अमन की राह पर ले जाने की सोच वाले होंगे। उन्होंने कहा हमें तो मंजिल मिल गयी।

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