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सबरमती आश्रम के अध्यक्ष अब्दुल हामिद कुरैशी दफनाए नहीं गए, उनका हुआ अंतिम संस्कार

सबरमती आश्रम के अध्यक्ष अब्दुल हामिद कुरैशी दफनाए नहीं गए, उनका हुआ अंतिम संस्कार
नई दिल्ली। गुजरात के साबरमती आश्रम के अध्यक्ष एवं कानूनविद अब्दुल हामिद कुरैशी की इंतकाल के बाद उन्हें दफनाने की बजाए आग के हवाले कर दिया गया। 89 वर्षीय कुरैशी की दिली इच्छा थी कि सांप्रदायिक सौहार्द के लिए उन्हें दफनाने की जगह उनका दाह-सांस्कार किया जाए। उनकी मौत के बाद उनकी वसीयत का ख्याल रखते हुए श्मशाम में अंतिम संस्कार किया गया।
बापू के साबरमती आश्रम के अध्यक्ष अब्दुल हामिद कुरैशी का शनिवार की शाम इंतकाल हो गया। उन्हांेने अहमदाबाद के नवरंगपुर स्थित स्वास्तिक सोसायटी में आखिरी सांस ली। कुरैशी को जब अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट लाया गया तो अन्य लोगों के साथ उनके परिवार के सभी सदस्य वहां मौजूद थे। उन्हें मुख्य अग्नि देने वालों में न्यायपलिका के लोग भी बड़ी तादाद में थे। कुरैशी इमाम साहब अब्दुल कादिर बावजीर के पोते थे। वह दक्षिण अफ्रीका में बापू के घनिष्ट मित्रों में थे। कुरैशी के भाई वाहिद कुरैशी के दामाद भारत नाइक ने बताया कि वह अपना दाह-संस्कार इस लिए चाहते थे ताकि सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम हो और उनकी मौत पर जमीन का टुकड़ा बर्बाद न किया जाए। चार वर्ष पहले ही उन्होंने अपने परिवार वालों के सामने इसकी ख्वाहिश रखी थी। यह बात वह अपने बेटे जस्टिस अकील कुरैशी को बारबार याद भी दिलाते रहते थे। इसपर सवाल उठाने वालों को बताया जाए कि यह उनकी अंतिम इच्छा थी।

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