सबरीमाला मंदिर पर बोले केजरीवाल, कहा- अमित शाह अराजकता पैदा कर रहे हैं

सबरीमाला मंदिर पर बोले केजरीवाल, कहा- अमित शाह अराजकता पैदा कर रहे हैं
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नई दिल्ली: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह पर अराजकता पैदा करने और लोगों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, “अमित शाह सक्रिय रूप से लोगों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। अराजकता पैदा कर रहे हैं। उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय संज्ञान लेगा।” केजरीवाल ने यह प्रतिक्रिया अमित शाह के उस बयान पर दी है, जिसमें शाह ने कहा है कि सर्वोच्च न्ययालय को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए, जिसे लेकर लोगों की धार्मिक आस्था में टकराव हो और उसे जमीन पर लागू नहीं किया जा सके।

कन्नूर में शाह ने कहा, “भाजपा अय्यप्पा के भक्तों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करेगी। अगर केरल सरकार सबरीमाला मंदिर की परंपरा को बलपूर्वक बदलने की कोशिश करती है तो हम सरकार को उखाड़ फेंकने से गुरेज नहीं करेंगे।” सरकार और वरिष्ठों के सहयोग से हुआ है जगन पर हमला

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मामले में 26 अक्टूबर से अब तक कुल 3,345 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। राज्य भर में विभिन्न पुलिस थानों में 517 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

पुलिस के मुताबिक, अभी तक केवल 122 प्रदर्शनकारी रिमांड में हैं जबकि अन्य को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। सबरीमाला तंत्री परिवार के सदस्य और कार्यकर्ता राहुल ईश्वर को तिरुवनंतपुरम में गिरफ्तार किया गया। उन्हें कोच्चि ले जाया गया है।

पुलिस को शिकायत मिली थी कि राहुल ईश्वर ने पिछले सप्ताह कोच्चि में इस मुद्दे पर भड़काऊ टिप्पणी की थी जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। पिछले 12 घंटों में पथनामथित्ता जिले, जहां भगवान अयप्पा का मंदिर स्थित है, के साथ ही तिरुवनंतपुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम के पुलिस स्टेशनों में 500 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज की गईं हैं।

पुलिस के मुताबिक, अभी तक केवल 122 प्रदर्शनकारी रिमांड में हैं जबकि अन्य को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। केरल पुलिस प्रमुख लोकनाथ बेहरा ने निर्देश दिया है कि उन लोगों की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए जिन्होंने भजन और प्रार्थनाओं के जरिए अपना विरोध जाहिर किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 28 सितंबर को अपने फैसले में 10 से 50 साल तक की उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के राज्य सचिव कोदियेरी बालाकृष्णन ने बताया कि कानून के शासन का उल्लंघन होने पर होने वाली यह सामान्य पुलिस कार्रवाई है। बालाकृष्णन ने सवालिया लहजे में कहा,”पिछले कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF शासन के दौरान, हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ चार लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे। क्या नियमों को तोड़ने पर पुलिस का कार्रवाई करना स्वभाविक नहीं है?

17 अक्टूबर को मंदिर को पांच दिन की मासिक पूजा के लिए खोला गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हर तरीके से यह सुनिश्चित किया कि 10 से 50 आयु वर्ग की कोई महिला मंदिर में दाखिल न हो सके।

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