Friday , January 19 2018

सब्र का दामन थाम लो

नहीं आई कोई मुसीबत ज़मीन पर और ना तुम्हारी जानों पर मगर वो लिखी हुई है किताब में इस से पहले कि हम उन को पैदा करें, बेशक ये बात अल्लाह के लिए बिलकुल आसान है, (हम ने तुम्हें ये इस लिए बता दिया है) कि तुम ग़मज़दा ना हो उस चीज़ पर जो तुम्हें ना मिल

नहीं आई कोई मुसीबत ज़मीन पर और ना तुम्हारी जानों पर मगर वो लिखी हुई है किताब में इस से पहले कि हम उन को पैदा करें, बेशक ये बात अल्लाह के लिए बिलकुल आसान है, (हम ने तुम्हें ये इस लिए बता दिया है) कि तुम ग़मज़दा ना हो उस चीज़ पर जो तुम्हें ना मिले और ना इतराने लगू उस चीज़ पर जो तुम्हें मिल जाये, और अल्लाह ताआला दोस्त नहीं रखता किसी मग़रूर-ओ-शेखी बाज़ को। (सूरत अलहदीद।२२,२३)

आम इंसानों का ये वतीरा हैके जब मुसीबतें उन्हें चारों तरफ़ से घेर लेती हैं तो वो दिल शिकस्त और मायूस होकर बैठ जाते हैं। अपनी क़िस्मत को कोसते हैं, गर्दिश-ए-रोज़गार को मलामत करते हैं और होसला हार बैठते हैं, लेकिन जब हालात साज़गार होते हैं, कारोबार में नफ़ा होता है, ज़राअत और बाग़ात से ख़ूब आमदनी होती है तो फिर होशि से फूले नहीं समाते।

ये ख़्याल करने लगते हैंके ये सब उनके ताला अर्जुमंद की बरकत है, वो ख़ुद बड़े ज़ेरक और मुआमलाफह्म है, कारोबार और ज़राअत के इसरार-ओ-रमूज़ पर उन्हें कामिल दस्तरस हासिल है, यानी ये सारी कामयाबियां उनकी अपनी ज़हानत और होशमंदी का नतीजा हैं, जब कि ये दोनों हालतें इंसान के लिए इंतिहाई ख़तरनाक हैं।

इन आयात में इस हक़ीक़त को वाज़िह कर दिया गया कि जो मुसीबत तुम पर आई है, इस से कोई मुफ़िर ना था। तुम्हारे पैदा होने से पहले ये तुम्हारे मुक़द्दर में लिखा जा चुका था, इस लिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं, ज़बर का दामन मज़बूती से पकड़े रहो और अपनी जद्द-ओ-जहद जारी रखू और जो नेअमतें तुम्हें बख़शी गई हैं, वो भी तुम्हारे पैदा होने से पहले तुम्हारी तक़दीर में रक़म हो गई थीं, उन पर अल्लाह ताआला का शुक्र अदा करो, ताकि वो अपने एहसानात से तुम्हें बहरावर रखे।

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