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“समन्दर की लहरों से भी ताक़तवर एक उम्मीद”, सीरयाई लड़की दुआ की दिल मोह लेनी वाली दास्तान

दमिश्क़: यूरोप की ओर पलायन के दौरान दुआ का मंगेतर भूमध्य सागर के खूनी लहरों की भेंट चढ़ गया। जब दुआ को एक बचाव कार्य के दौरान बचाया गया, तब वह दो मासूम बच्चों को बाँहों में संभाले हुए थी।

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अपने धीमी और मासूम अंदाज़ में जब वह अपनी कहानी सुना रही थी तो उसके सामने बैठे लगभग 15 पत्रकार उसके अंदाज़ से प्रभावित हुए बिना न रह सके। जब उसने बातचीत को खत्म किया तो उन पत्रकारों ने खड़े होकर काफी देर तक उन्हें दाद दी।

दुआ की सच्ची और दर्द भरी दास्तान यू एन एच सी आर से जुड़े मेलिसा फ्लेमिंग और खुद दुआ ने मिलकर एक किताब के रूप में प्रकाशित किया है। पुस्तक का शीर्षक “समन्दर की लहरों से भी ताक़तवर एक उम्मीद”’ रखा गया है। फ्लेमिंग ने संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामलों से संबंधित इस संस्था के लिए अपनी प्रतिबद्धता के दौरान सैकड़ों ऐसे इंसानों की कहानियां सुनीं और देखीं, जो अपने घरों से निकलने के बाद ‘इन्सान’ के बजाय सिर्फ ‘प्रवासी’ बन कर रह गए थे।

दुआ ने बड़े धैर्य के साथ अपने बचपन के बारे में बताया। वह दक्षिण पूर्वी सीरिया के एक शहर में अपने परिवार के साथ रहती थी। जब बशर अल असद सत्ता में आए और दमिश्क की सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हुए तब वह महज छह वर्ष की थी। उसने बताया कि जब उसके पिता की दुकान नष्ट हो गई तो उन्होंने मिस्र की ओर पलायन का फैसला किया।

मिस्र में तब मुर्सी सत्ता में थे। दुआ के अनुसार मिस्र की जनता में मुर्सी का डर था, लेकिन जब अलसीसी ने सत्ता संभाल लिया तो हालात और बिगड़ गए। तब दुआ और उसके मंगेतर बासिम ने यूरोप का रुख करने का फैसला किया। सितंबर 2014 में वे दोनों एक नाव में सवार होकर भूमध्य सागर में उतर गए। इस नाव में पांच सौ से अधिक लोग सवार थे। दुआ इस सफर से डरी हुई थी क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था।

और फिर वही हुआ जिसका खतरा था। नाव पलट गई। दुआ और बासिम एक साथ ही थे लेकिन उनके आसपास लोग डूबते जा रहे थे। दो दिनों तक भूमध्य के खुले पानी में वे नाव को थामे अपने जीवन की दुआएं करते रहे लेकिन अंत में बासिम की बाहें शल हो गईं। दुआ ने उसे अपनी आंखों के सामने डूबते हुए देखा वह मंज़र आज भी उसकी आँखों में आँसू ले आता है।

दुआ के हाथ तैरने में सहायक एक रिंग लगा और वह उसकी मदद से चलती रही। एक डूबते जोड़े ने अपने दो नन्ही बच्चियां उसके हवाले कीं और दुआ से अनुरोध किया कि वे उनका ख्याल रखे। एक बच्ची केवल नौ महीने की थी, दुआ ने दोनों को थाम लिया। फिर वह जोड़ा भी समुद्र की लहरों की भेंट चढ़ गया।

दुआ इन बच्चियों के साथ बच गई और इटली पहुंच गई। इस घटना के ढाई साल बाद अब दुआ स्वीडन में प्रवासी के रूप में रह रही है। उसे उम्मीद है कि एक दिन वह अपने देश, अपने घर लौट पाएगी।

दुआ के सह लेखक फ्लेमिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रवासी विरोधी यूरोपीय नेताओं का नाम लिए बिना कहा कि कुछ राजनेता लोगों के मन में मौजूद ‘अजनबियों से डर’ को अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

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