Saturday , December 16 2017

सरकारी अख़राजात में मज़ीद कमी का इशारा

मुंबई क़र्ज़ की रक़म पर हुकूमत चलाना दुरुस्त नहीं - अरूण जेटली का ख़िताब

मुंबई

क़र्ज़ की रक़म पर हुकूमत चलाना दुरुस्त नहीं – अरूण जेटली का ख़िताब

माह नवंबर में इक़तिसादी ख़सारा को पार करने के बाद वज़ीरे फाइनेंस‌ अरूण जेटली ने आज इशारा दिया है कि अख़राजात में मज़ीद कमी की जा सकती है ताकि जारीया इक़तिसादी साल के दौरान ख़सारा को एक हद के अंदर रखा जा सके। वमेर फाइने ने कहा कि वो क़र्ज़ पर हासिल की जाने वाली रक़म पर ज़िंदा रहने में यक़ीन नहीं रखते।

अरूण जेटली ने यहां सनअतकारों और मंसूबा साज़ों के एक इजलास से वीडियो कान्फ़्रेंस के ज़रीया ख़िताब करते हुए कहा कि हम इस बात क्या कोशिश कर रहे हैं कि जहां तक हुकूमत का सवाल है अख़राजात को माक़ूलीयत की शक्ल दी जाये ताहम हम नहीं चाहते कि हुकूमत गैर मीना मुद्दत के लिए क़र्ज़ पर हासिल करनेवाली रक़म के ज़रीया चलाई जा सके।

उन्होंने कहा कि अपनी आमदनी से ज़्यादा अख़राजात करना और अपने इज़ाफ़ी ख़र्च का क़र्ज़ आइन्दा नसल को अदा करने के लिए छोड़ देना बेहतर और मूसिर इक़तिसादी पॉलीसी नहीं होसकती। हुकूमत ने अख़राजात में कमी की जो बात कही है वो कम अज़ कम दस फ़ीसद से ज़्यादा होसकती है।

हुकूमत ने ऐलान किया है कि वो इक़तिसादी ख़सारा को बजट के तख़मीना के मुताबिक़ 4.1 फ़ीसद तक लाना चाहती है । ताहम माह नवंबर के दौरान ये हद पार होगई थी । उस वक़्त इक़्तिसादी साल के ख़ातमा के लिए चार माह बाक़ी थे । बजट 2015 – 16 से क़बल मिस्टर जेटली ने इशारा दिया कि मुस्तहकम टैक्स निज़ाम अहमियत का हामिल है और रियासतों और मर्कज़ की जानिब से मालिया हासिल करने के लिए कोई गैर मुंसिफ़ाना इक़दाम नहीं किया जाएगा।

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