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सरकारी इदारों में अक़ल्लीयतों की अदम नामज़दगी

हैदराबाद।०५ जुलाई (सियासत न्यूज़) अक़ल्लीयतों से मुताल्लिक़ सरकारी इदारों पर नामज़दगीके सिलसिले में हुकूमत से बारहा नुमाइंदगी के बावजूद इस सिलसिले में कोई तवज्जा नहीं दी जा रही ही, जिस से कांग्रेस पार्टी के क़ाइदीन और कारकुनों

हैदराबाद।०५ जुलाई (सियासत न्यूज़) अक़ल्लीयतों से मुताल्लिक़ सरकारी इदारों पर नामज़दगीके सिलसिले में हुकूमत से बारहा नुमाइंदगी के बावजूद इस सिलसिले में कोई तवज्जा नहीं दी जा रही ही, जिस से कांग्रेस पार्टी के क़ाइदीन और कारकुनों में मायूसी पाई जाती है। अक़ल्लीयती फ़ीनान्स कारपोरेशन, उर्दू एकेडेमी और अक़ल्लीयती कमीशन गुज़श्ता बरसों से मख़लवा हैं जिस के बाइस इन इदारों की कारकर्दगी मुतास्सिर हो चुकी है।

चीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी ने ज़िम्मेदारी सँभालने के बाद कई बार अक़ल्लीयती क़ाइदीन को तीक़न दिया था कि नामज़द ओहदों पर बहुत जल्द तक़र्रुत किए जाएंगी। दिलचस्प बात तो ये है कि आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट ने अक़ल्लीयती कमीशन पर तक़र्रुत की हिदायत दी थी लेकिन हाइकोर्ट की इस हिदायत को भी हुकूमत ने नजरअंदाज़ करदिया। आँजहानी डाक्टर वाई ऐसराज शेखर रेड्डी ने 2004-ए-में इक़तिदार सँभालने के बाद अक़ल्लीयती इदारों पर तक़र्रुत किए थी, लेकिन इदारों पर मीयाद ख़तन होने के बाद तीन इदारे आज तक ख़ाली हैं। सिर्फ हज कमेटी और वक़्फ़ बोर्ड पर तक़र्रुत किए गई।

के रोशिया और फिर किरण कुमार रेड्डी ने अक़ल्लीयती इदारों पर तक़र्रुत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई हती कि उन्हों नेमुताल्लिक़ा वज़ीर-ए-क़लीयती बहबूद से इस मसला पर आज तक कोई मुशावरत नहीं की। कांग्रेस के बाअज़ अक़ल्लीयती क़ाइदीन चीफ़ मिनिस्टर और हाईकमान से अपनी क़ुरबत का दावा करते हैं, लेकिन उन के ये दावे खोखले साबित हुए क्योंकि इन क़ाइदीन ने कई बारअख़बारी ब्यानात के ज़रीया ऐलान किया था कि चीफ़ मिनिस्टर बहुत जल्द अक़ल्लीयतीइदारों पर तक़र्रुत करने वाले हैं।

अब जबकि आम इंतिख़ाबात को दीढ़ साल का वक़्त बाक़ी है, नामज़द ओहदों पर अक़ल्लीयती क़ाइदीन के तक़र्रुत महिज़ एक ख़ाब नज़र आरहे हैं, क्योंकि ग़ैर अक़ल्लीयती इदारों पर भी नामज़दगी के सिलसिले में हुकूमत ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

हालिया ज़िमनी इंतिख़ाबात में कांग्रेस की शिकस्त के बाद कांग्रेस आला कमान ने पार्टी कारकुनों को ख़ुश करने केलिए नामज़द ओहदों पर तक़र्रुत का मश्वरा दिया था, लेकिन चीफ़ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी और सदर प्रदेश कांग्रेस बोतसा सत्य ना रावना को नामज़द ओहदों पर तक़र्रुत से ज़्यादा अपनी कुर्सी बचाने की फ़िक्र है। कांग्रेस पार्टी एक तरफ़ अक़ल्लीयतों की हमदर्दी के दावे करती है लेकिन ऐसा महसूस होता है कि उसे हक़ीक़त में अक़ल्लीयतों की ताईद से कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं।

हालिया ज़िमनी इंतिख़ाबात में कांग्रेस को शिकायत है कि अक़ल्लीयतों ने वाई ऐस आर कांग्रेस पार्टी के हक़ में अपने वोट का इस्तिमाल किया। इन हालात में अक़ल्लीयती इदारों पर तक़र्रुत का अमल और भी अलतवा का शिकार हो सकता है। एससी , एसटी तबक़ात के लिए बजट में अलैहदा सब प्लान की तजवीज़ है और पसमांदा तबक़ात भी 5 हज़ार करोड़ रुपय के सब प्लान के लिए जद्द-ओ-जहद कररहे हैं, लेकिन अक़ल्लीयतों के लिए इस तरह के सब प्लान की कोई तजवीज़ हुकूमत के ज़ेर-ए-ग़ौर नहीं और ना ही हुकूमत से जद्द-ओ-जहद करते हुए सब प्लान हासिल करने वाले क़ाइदीन नज़र आ रहे हैं।

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