Wednesday , April 25 2018

सरकारी बैंकों से बेहतर स्थिति में निजी बैंक, एसबीआई का बैड लोन का भार सबसे ज्यादा

नई दिल्ली : एक तरफ मोदी सरकार बैंकों को बैड लोन (NPA) के जाल से उभारने की कोशिश् में जुटी हुई है. वहीं, बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ता जा रहा है. सितंबर, 2017 को खत्म हुई तिमाही में सरकारी बैंकों का एनपीए 7.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. सरकार ने बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कॉरपोरेट हाउस और अन्य कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है. उनके मुताबिक बैंकों के कुल एनपीए में इनकी भागीदारी 77 फीसदी है.

दूसरी तरफ, सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों का एनपीए काफी कम है. वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी डाटा के मुताबिक निजी बैंकों का एनपीए 30 सितंबर तक 1.03 लाख करोड़ रुपये था. वित्त मंत्रालय ने आरबीआई डाटा का हवाला देते हुए ये आंकड़े पेश किये हैं. वित्त मंत्रालय ने बताया कि 30 सितंबर को खत्म हुई तिमाही तक सरकारी बैंकों का कुल बैड लोन 7,33,974 करोड़ रुपये है. वहीं, निजी बैंक इस मामले में सरकारी बैंकों से काफी बेहतर स्थ‍िति में हैं. इनका कुल एनपीए 1,02,808 करोड़ रुपये है.

प्रमुख सरकारी बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक पर सबसे ज्यादा बैड लोन का भार है. एसबीआई का एनपीए 1.86 लाख करोड़ रुपये है. दूसरे नंबर पर पंजाब नेशनल बैंक है. पीएनबी का एनपीए 57,630 करोड़ रुपये है. इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया (49,307 करोड़), बैंक ऑफ बड़ोदा ( 46,307 करोड़ रुपये), कैनरा बैंक ( 39,164 करोड़) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ( 38,286 करोड़) शामिल हैं.

निजी बैंकों में सबसे ज्यादा एनपीए आईसीआईसीआई बैंक का है. आईसीआईसीआई बैंक पर 44,237 करोड़ रुपये के बैड लोन का भार है. इसके बाद दूसरे नंबर पर एक्‍स‍िस बैंक ( 22,136 करोड़ रुपये है). इनके बाद एचडीएफसी बैंक (7,644 करोड़) व जम्मू और कश्मीर बैंक के पास 5,983 करोड़ रुपये का बैड लोन है. वित्त मंत्रालय ने बताया कि बैड लोन की रिकवरी करने के लिए कई प्रोविजन तैयार किए गए हैं. इसके लिए डेट रिकवरी ट्र‍िब्यूनलों का दायर बढ़ाया गया है.

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