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सरकारी सकीमात में मुसलमान नज़रअंदाज

मुमताज़ माहिर-ए-तालीम और समाजी जहद कार ज़हूर ख़ालिद ने आम चुनाव के पेशे नज़र मुसलमानों में सियासी शऊर बेदार करने के लिए एक पम्पलेट शाय किया है जिस में मर्कज़ और रियासत में बरसर-ए-इक्तदार कांग्रेस हुकूमत की कारकर्दगी का जायज़ा लिया गया ह

मुमताज़ माहिर-ए-तालीम और समाजी जहद कार ज़हूर ख़ालिद ने आम चुनाव के पेशे नज़र मुसलमानों में सियासी शऊर बेदार करने के लिए एक पम्पलेट शाय किया है जिस में मर्कज़ और रियासत में बरसर-ए-इक्तदार कांग्रेस हुकूमत की कारकर्दगी का जायज़ा लिया गया है और दरयाफ़त किया कि चुनाव वादों की तकमील में वो नाकाम क्यों होगई।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने 2004 के अपने चुनाव मंशूर में मुंदरजा ज़ैल उमूर को शामिल करते हुए मुसलमानों की हिमायत हासिल की थी और दो मर्तबा रियासत आंध्र प्रदेश में हुकूमत तशकील दी। 2004 से कांग्रेस को हुकूमत के लिए 10 बरस मिले मगर इस ने मुस्लिम हिमायतीयों और उनके मसाइल को फ़रामोश कर दिया।

ये दरअसल याददहानी का मकतूब है जिस में ग़ैर तकमील शूदा वादों को पेश किया गया है। साथ ही साथ मुस्लिम राय दहिंदों के शऊर को बेदार करने और कांग्रेस के क़ाइदीन से जवाबतलब करने की कोशिश की गई ये।

कितने ताज्जुब की बात है कि 2012-13का बजट 1027 करोड़ का ऐलान हुआ मगर ताहाल सिर्फ़ 305 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए। माबकी रक़म मार्च 2014 तक वापिस होजाएगी।

ग़रीब मुसलमानों के लिए एलान करदा मुख़्तलिफ़ सकीमात पर अमल आवरी नहीं होगी। पिछ्ले चार बरस तामीराती और नज़म-ओ-नसक़ की मंज़ूरी की ख़ातिर 32 मुस्लिम ब्वॉयज़ ऐंड गर्लज़ हॉस्टेलस ( पोस्ट ऐंड परी मेट्रिक ) पेंडिंग में हैं।

करीमनगर मुस्लिम गर्लज़ हॉस्टेलस 50 लड़कीयों के साथ पिछ्ले 6 बरस से चलाया जा रहा है जहां पीने के पानी, बिस्तर, चारपाई और मैस की बुनियादी सहूलतें नहीं हैं। लड़कीयां फ़र्श पर ख़ुद पकवान करने और सोने के लिए मजबूर हैं। करीमनगर मुस्लिम ब्वॉयज़ हॉस्टेल के ग्रांऊड का हाल रुकन पार्लियामेंट के MPLAD फ़ंड से तामीर किया गया।

ज़िला इंतेज़ामीया ना तो प्रोग्राम पर अमल आवरी कररहा है और ना ही मुख़्तलिफ़ शोबाजात की कारकर्दगी का जायज़ा लेने के लिए सरकारी ओहदेदार और अवामी नुमाइंदों के माहाना जायज़ा मीटिंग का इनइक़ाद अमल में आरहा है।

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