Wednesday , December 13 2017

सरकारी स्कूलों की अदम हिसारबंदी से ख़तरा

यलारेडी ०९ फरवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) सरकारी स्कूलों की हिसारबंदी ना होने पर तलबा-ए-को मुख़्तलिफ़ दुशवारीयों का सामना करना करना पड़ रहा है। ख़ासकर शाहराह के किनारे मौजूद स्कूलों में पढ़ रहे तलबा-ए-को गाड़ीयों से हादिसा का शिका

यलारेडी ०९ फरवरी (सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़) सरकारी स्कूलों की हिसारबंदी ना होने पर तलबा-ए-को मुख़्तलिफ़ दुशवारीयों का सामना करना करना पड़ रहा है। ख़ासकर शाहराह के किनारे मौजूद स्कूलों में पढ़ रहे तलबा-ए-को गाड़ीयों से हादिसा का शिकार का ख़तरा है।

मंडल यलारेडी कुछ सरकारी स्कूल्स शाहराहों के बाज़ू में ही हैं और उन स्कूलों को हिसारबंदी के ज़रीया महफ़ूज़ करना कोई ज़रूरी नहीं समझ रहे हैं। जबकि कई मर्तबा आने जाने वाली मोटर गाड़ीयों से हादिसात होने के वाक़ियात होते हैं। यलारेडी, कामा रेड्डी शाहराह के बाज़ू हाजी पर तांडा प्राइमरी स्कूल है।

और कामा रेड्डी जाने वाली सड़क होने से रोज़ाना कई आर टी सी बसें लारियां, आटोज़, बाईक्स अनगिनत चलते रहते हैं जिस से स्कूल में ज़ेर-ए-तालीम तलबा-ए-को बाहर आने पर हमेशा ख़तरा बरक़रार रहता है और यलारेडी मुस्तक़र पर ईदगाह रोड मौजूद सरकारी अपर प्राइमरी उर्दू मीडियम स्कूल भी हिसारबंदी से ख़ाली है।

जिस की वजह से स्कूल की जमातों तक जंगली ख़िंज़ीर, कुत्ते वग़ैरा अक्सर आते रहते हैं जिस से तलबा-ए-को ख़तरा है। स्कूल के तलबा-ए-को हर रोज़ दोपहर का खाना दिया जाता है। इस मौक़ा पर ख़िंज़ीर जानवर कसरत से अंदर तक आ जाते हैं। तलबा-ए-को सेहतमंद ग़िज़ा देने में हुकूमत सेहत माहौल देना शायद भूल गई।

अगर हिसारबंदी कर दी जाय तो स्कूल और तलबा-ए-मुकम्मल महफ़ूज़ रहेंगी। और कोई जानवर दाख़िल ना आ सकेगा। क्योंकि तलबा-ए-दोपहर में खाते वक़्त जंगल स्वर मंडलाते फिरते हैं जिससे पर गंदा माहौल नज़र आता है। इसी तरह ब्रहमना पली, जंगा माया पली, मवाज़आत में भी सरकारी स्कूल्स सड़क के किनारे वाक़्य हैं। औलयाए तलबा-ए-का कहना है कि स्कूल की हिसारबंदी के लिए कई मर्तबा मुताल्लिक़ा आला ओहदेदारों से सिफ़ारिश की गई लेकिन अदम दिलचस्पी से मायूस रहे और मवाज़आत मैं एस एम सी कमेटी इजलासों में भी ओहदेदारों को कई बार हिसारबंदी के लिए तवज्जा दिलाई गई लेकिन कोई फ़ायदा ना रहा।

औलयाए तलबा-ए-की अपील है कि इन सरकारी स्कूलों में उन के बच्चे ग़ैर महफ़ूज़ हैं इस लिए जल्द अज़ जल्द हिसारबंदी का काम किया जाए। सरकारी स्कूल्स हिसारबंदी के ना होने पर कहां तक महफ़ूज़ हो सकते हैं। हुकूमत ने तो क़ानून हक़ तालीम के ज़रीया लाज़िमी तालीम का निज़ाम आम करने पर है तो दूसरी तरफ़ तालीमगाह अदम महफ़ूज़ ताज्जुब की बात है।

ख़ानगी मदारिस के तर्ज़ तरीक़ा पर सरकारी स्कूलों को भी गामज़न करने के लिए मुख़्तलिफ़ तरीक़ा से कोशिश जारी है लेकिन सब से क़बल सरकारी स्कूलों की इमारतों को बेहतर बुनियादी सहूलतों से परकिया जाए। तब कहीं जाकर सरकार के दावे कामयाब होते दिखाई देंगे।

कई सरकारी स्कूलों में बेहतर पीने के पानी का तक इंतेज़ाम नहीं जबकि दोपहर का खाना ज़रूर देने का इंतिज़ार है। खाना है लेकिन पानी नहीं, ये हुकूमत और ज़िम्मा दारान कुछ इस तरह ये अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं।

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