सरकार ने राफेल जेट के दाम संसद को नहीं बताए, लेकिन कैग को बताए- सुप्रीम कोर्ट

सरकार ने राफेल जेट के दाम संसद को नहीं बताए, लेकिन कैग को बताए- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि उसके सामने पेश की गयी सामग्री दर्शाती है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू जेट के मूल्य निर्धारण ब्योरे से संसद को अवगत नहीं कराया, लेकिन उसने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के समक्ष इसका खुलासा किया.शीर्ष अदालत ने कहा कि कैग रिपोर्ट को संसद की लोक लेखा समिति परख भी चुकी है. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा, ‘हमारे सामने पेश की गयी सामग्री दर्शाती है कि सरकार ने विमान के मूल दाम को छोड़कर मूल्य निर्धारण का ब्योरा संसद को भी नहीं दिया है, इस आधार पर कि मूल्य निर्धारण विवरण की संवेदनशीलता से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होगी और दोनों देशों के बीच के समझौते का भी उल्लंघन होगा.

पीठ ने कहा कि हालांकि मूल्य निर्धारण ब्योरा नियंत्रक और महालेखा परीक्षक को दिया गया और कैग की रिपोर्ट पर लोक लेखा समिति विचार भी कर चुकी है. कोर्ट ने कहा, ‘रिपोर्ट का केवल संपादित अंश ही संसद के सामने रखा गया.

बता दें कि राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी यह साबित करके रहेगी कि इस विमान सौदे में ‘चोरी’ हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर शीर्ष अदालत में कैग रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है, जबकि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है. गांधी ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर यह जांच हो गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम ही सामने आएगा.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीएसी (लोक लेखा समिति) को कैग रिपोर्ट दी गई है, जबकि पीएसी को कोई रिपोर्ट नहीं मिली. ये कैसे हो सकता है कि जो कैग रिपोर्ट फैसले की बुनियाद है वो पीएसी में किसी को नहीं दिखी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दिखी? जब कोई झूठ बोलता है तो वह कहीं न कहीं नजर आ जाता है. अब सरकार हमें बताए कि सीएजी रिपोर्ट कहा हैं? हमें यह दिखाएं.

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी. साथ ही शीर्ष अदालत ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को केस दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है.

ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जनता को गुमराह करने और सेना के बारे में संदेह पैदा करने के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से मांफी मांगनी चाहिए.

Top Stories