सरकार बाबा साहेब अम्बेडकर के संविधान को जबर्दस्ती फेल साबित करने के षडयंत्र में लगी हुई है: मायावती

सरकार बाबा साहेब अम्बेडकर के संविधान को जबर्दस्ती फेल साबित करने के षडयंत्र में लगी हुई है: मायावती

नई दिल्ली: बी.एस.पी. अध्यक्ष मायावती के नेतृत्व में पूरे देश ने भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को उनके अनुयायियों ने आज उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि व श्रद्धा-सुमन अर्पित की तथा उनके सपनों का तथा संविधान की सही व सच्ची मंशा पर आधारित जातिविहीन मानवतावादी भारत राष्ट्र बनाने के लिए वोटों के माध्यम से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने के दृढ़संकल्प को भी दोहराया क्योंकि उन्हें मालूम है कि देश में सर्वसमाज का हित बी.एस.पी. की ’’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’’ कीे नीति व सिद्धान्त में ही निहित है और जिसका विरोधी पार्टियों ख़ासकर बीजेपी व कांग्रेस पार्टी की सरकारों में हमेशा घोर अभाव रहा है जिसके कारण ही आज़ादी के लगभग 71 वर्षों बाद भी करोड़ों गरीबों, मज़दूरों, किसानों, दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट के ग़रीबों का जीवन पूरी तरह से मजबूर, लाचार, गुलाम व हर प्रकार से त्रस्त है, लेकिन अब इस अभिशाप को वोटों के माध्यम से बदलने की जरूरत हर तरफ महसूस की जा रही है।

बी.एस.पी. प्रमुख सुश्री मायावती जी के निर्देंशानुसार बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे देश भर में पार्टी द्वारा विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित करके लोगों ने अपने मसीहा को भरपूर याद किया व उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया।

बी.एस.पी. मूवमेन्ट की ख़ास कर्मभूमि उत्तर प्रदेश में, जहोँ उसने सर्वसमाज के सहयोग से चार बार जनहित की अति-उत्तम व बेहतरीन सरकार चलाकर दिखाई है, सभी 18 मण्डलों में इस अवसर पर संगोष्ठी व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जबकि लखनऊ मण्डल में बी.एस.पी. के कार्यकर्ताओं व अनुयाइयों ने राजधानी में गोमती तट पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा निर्मित ऐतिहासिक महत्त्व के भव्य व विशाल ‘‘डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल‘‘ के मध्य में स्थित गुम्बदाकार के ‘‘डा. अम्बेडकर स्मारक‘‘ में भारी संख्या में पहुँचकर वहाँ डा. अम्बेडकर की लिंकन-मुद्रा में स्थापित प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि आदि करके उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किये और उनके कारवाँ को आगे बढ़ाते रहने का पुनः संकल्प लिया।

इस सन्दर्भ में बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी, जो खासकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं दक्षिणी भारतीय राज्य तेलंगाना में हो रहे विधानसभा आमचुनाव के चुनावी अभिायान कीं जबर्दस्त व्यस्थता के कारण उन राज्यों के अनुरोध पर ही इनदिनों दिल्ली में ही हैं, ने आज सुबह 3 त्यागराज मार्ग स्थित अपने निवास पर बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की चित्र पर माल्यार्पण करके श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। इस अवसर पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारीगण भी मौजूद थे।

इस अवसर पर अपने संक्षिप्त सम्बोधन में सुश्री मायावती जी ने कहा कि वैसे तो यह वास्तविकता देश व दुनिया के समाने है कि कांग्रेस पार्टी ने केन्द्र व विभिन्न राज्यों में अपने लम्बे शासनकाल के दौरान सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों व अन्य मेहनतकश आमजनता के साथ-साथ करोड़ों दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को कभी भी ईमानदारीपूर्वक उनको आत्म-सम्मान व स्वाभिमान से जीवन व्यतीत करने का संवैधानिक अधिकार नहीं दिया और केवल कागजी कार्रवाई आदि करके इन वर्गों के असली राजनीतिक, शैक्षणिक व आर्थिक हितों पर कुठाराघात करती रही और इनके शिक्षा व नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था को भी लगभग निष्प्रभावी बनाया, जिसका ही परिणाम है कि अथक मेहनत व संघर्षों के बावजूद इन वर्गों के करोड़ों लोगों की दशा आज भी हर प्रकार से काफी ज्यादा दयनीय बनी हुई है तथा ये लोग हर प्रकार की जातिवादी जुल्म-ज्यादती आदि के शिकार हैं।

लेकिन बीजेपी की वर्तमान केन्द्र सरकार अपने पूरे शासनकाल में इन वर्गों की घोर उपेक्षा के साथ-साथ बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के संविधान को ही हर प्रकार से फेल करने के षडयंत्र में ही लगी रही और इस क्रम में केन्द्र सरकार ने हर संवैधानिक व स्वायत्तशासी संस्थाओं का, जो कि इन वर्गों के संघर्ष को ताकत व लोकतंत्र को शक्ति प्रदान करते हैं, घोर दुरूपयोग करने का प्रयास किया। परन्तु अच्छी बात यह रही है कि देश की लोकतंत्र की असली प्रहरी यहाँ की गरीब परन्तु जागरूक आमजनता, किसान वर्ग व अन्य समस्त मेहनतकश लोग समय≤ पर इस सरकार को करारा जवाब देते रहे हैं, जिससे इस सरकार को अबतक सचेत हो जाना चाहिये था परन्तु फिर भी बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारें अपनी संकीर्ण जातिवादी व साम्प्रदायिक नीतियों व खासकर अपनी गरीब, मजदूर व किसान-विरोधी नीतियों व रवैयों पर अडियल रवैया अपनाकर अपने अहंकारी होने का ही परिचय दिया है, जिसका कड़ा ख़ामियाज़ा उन्हें आगे भी भुगतने के लिये तैयार रहना चाहिये, ऐसी आम धारणा देश भर में देखने को मिल रही है।

इतना ही नहीं बल्कि ख़ासकर अभूतपूर्व संकट झेल रहे खेत, खेती व किसानों के मामलों में तो इस सरकार की नीति व रणनीति भी ऐसी ग़लत व अनुपयोगी रही है कि देश के लगभग सभी राज्यों में किसान वर्ग के लोग काफी ज्यादा आक्रोशित व आन्दोलित हैं। केन्द्र की बीजेपी सरकार ने जब-जब किसानों को बड़े-बड़े लुभावने वायदों में बहकाने का प्रयास करती है, तब-तब किसानों काफी दुःख झेलकर भी अपनी तन, मन की पूरी शक्ति के साथ सरकार की गलत नीति व रवैये के विरोध करने के लिये देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों तक पर मार्च करके अपना जबर्दस्त विरोध व आक्रोश प्रकट करते हैं।

इसके अलावा, केन्द्र सरकार किसानों को फसल बीमा आदि के नाम पर बड़े-बड़े दावे करके वरग़लाने का प्रयास करती रहती है जबकि किसान समाज का दुखड़ा यह है कि सरकारी ख़जाने का अरबों रुपया केन्द्र सरकार मुफ्त में ही प्रीमियम चुकाने के नाम पर निजी क्षेत्र की बीमा कम्पनियों की झोली में डालती चली जा रही है, जो धन्नासेठों का खुला समर्थन व किसानों के साथ क्रूर मज़ाक व सरासर अन्याय नहीे तो और क्या है।

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