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सरबजीत की रिहाई के लिए हुकूमत ने बरवक़्त इक़दाम नहीं किया: दलबीर कौर

भोपाल, 22 जनवरी (पी टी आई) पाकिस्तानी जेल में महरूस सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने आज एक इंतिहाई फ़िक्र मंदाना अंदाज़ में हकूमत-ए-हिन्द से शिकायती लहज़े में कहा कि उनके भाई की रिहाई के ताल्लुक़ से हुकूमत संजीदा नहीं है वर्ना बरवक़्त इक़द

भोपाल, 22 जनवरी (पी टी आई) पाकिस्तानी जेल में महरूस सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने आज एक इंतिहाई फ़िक्र मंदाना अंदाज़ में हकूमत-ए-हिन्द से शिकायती लहज़े में कहा कि उनके भाई की रिहाई के ताल्लुक़ से हुकूमत संजीदा नहीं है वर्ना बरवक़्त इक़दामात कर के सरबजीत को रिहा किया जा सकता था जो 1990 की दहाई से जेल की सऊबतें झेल रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर हुकूमत ने सरबजीत की रिहाई के लिए बरवक़्त इक़दामात किए होते तो उनका भाई आज उनके साथ होता। याद रहे कि दलबीर कौर और सरबजीत सिंह की बेटी पूनम एक ऐसे इजलास में शिरकत के लिए यहां पहुंची हैं जो सरबजीत की रिहाई के मुतालिबा में शिद्दत पैदा करने के लिए मुनज़्ज़म किया गया है ।

इस मौक़े पर दलबीर कौर ने ये इन्किशाफ़ ( ज़ाहिर)भी किया कि अर्सा क़बल उन्होंने अपने भाई की रिहाई के लिए उस वक़्त के वज़ीर-ए-आज़म आँजहानी नरसिम्हा राव से भी मुलाक़ात की थी लेकिन इस मुलाक़ात के भी कोई मुसबत नताइज सामने नहीं आए थे । दूसरी तरफ़ पूनम ने भी मौजूदा वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है जहां उन्होंने उनसे अपील की है कि वो पाकिस्तानी हुकूमत पर दबाओ डालते हुए सरबजीत सिंह की रिहाई को यक़ीनी बनाएं।

इसने कहा कि अब तक हम जुमला 173 सयासी क़ाइदीन से मुलाक़ात कर चुके हैं लेकिन इनमें से एक भी सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए काम नहीं आया । याद रहे कि सरबजीत सिंह को 1990 की दहाई से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में रखा गया है। सरबजीत सिंह को 1990 में लाहौर और फैसलाबाद में सिलसिला वार बम धमाकों का मुबय्यना मुल्ज़िम क़रार दिया गया था ।

इन धमाकों में 14 अफ़राद हलाक हुए थे जबकि सरबजीत सिंह ने इद्दिआ किया था कि वो एक किसान है और ग़लत शनाख़्त का शिकार है। सरहद के करीब इसका मौज़ा वाकेय् होने की वजह से वो ग़लती से पाकिस्तानी हदूद में दाख़िल हो गया था और गिरफ़्तार कर लिया गया था । 1991 में उसे सज़ाए मौत सुनाई गई थी लेकिन इस पर हनूज़ अमल आवरी नहीं हुई है जबकि उसकी बहन एक अर्सा से सरबजीत की रिहाई के लिए कोशां है।

पाकिस्तान के एक अहम क़ाइद अंसार बरनी ने भी सरबजीत के अरकान ख़ानदान को तयक्कुन ( यकीन) दिया था कि सरबजीत रिहा हो जाएगा ।

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