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सर्वे में खुलासा- ‘भारत के बीपीओ में काम करने वाले लोग होते हैं नस्लभेद टिप्पणीयों का शिकार’

नई दिल्ली। देश में बीपीओ कॉल सेंटर्स का कल्चर इन दिनों काफी बढ़ रहा है और यह युवाओं का पसंदीदा जॉब फील्ड बनता जा रहा है। लेकिन, चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे अंधकार भी है। जो यहां काम करने वाले कर्मचारियों को कई बार फ्रस्टेट भी करता है।

हाल ही में जारी हुई बिजनस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेंटर्स इन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉल सेंटरों में काम करने वाले यूथ को नस्लभेदी टिप्पणियों और अपमानजनक शब्दों का भी सामना करना पड़ता है। शायद ऐसे ही कारणों से बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले युवा पेशेवरों में तनाव भी बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश से आनी वाली कॉल्स पर उन्हें नस्लवादी गालियां तक सुननी पड़ती हैं। अमरीकी लोग उन्हें ‘जॉब चोर’ तक कहते हैं। जिससे उन्हें कई बार अपने दोस्तों के बीच अपमानित होना पड़ता है।

सर्वे में बताया गया कि नस्लभेदी टिप्पणी के शिकार होने वाले कर्मचारी ज्यादा तनाव और स्ट्रेस में रहते हैं। रिपोर्ट तैयार करने वाली इंग्लैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ केंट की श्वेता राजन ने बताया कि, ‘यह मंदी के बाद की सच्चाई है। पश्चिमी देशों के क्लाइंट्स का स्वभाव कॉल सेंटर कर्मियों के लिए काफी रूखा होता है।

जब उन्हें पता चलता है कि कॉलर भारतीय है तो उनका सबसे बड़ा डर यह होता है कि ये लोग उनकी नौकरी चुरा रहे हैं और सारी चीजें आउटसोर्स हो रही हैं।’ इन कारणों से यहां के बॉस या ऑनर अपने कर्मचारी से इस तरह पेश आते हैं।

शोधकर्ता श्वेता ने बताया कि ब्रेग्जिट और अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी टिप्पणियां और बढ़ गई हैं। रिसर्च में शामिल किए गए लगभग सभी कॉल सेंटर कर्मियों ने माना कि उन्हें कभी न कभी नस्लभेदी टिप्पणी का सामना करना पड़ा है।

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