Thursday , December 14 2017

सलामती कौंसिल, जंगी जराइम का नोट ले

सऊदी अरब की हुकूमत ने फ़लस्तीनी शहर ग़ाज़ा की पट्टी पर क़ाबिज़ इसराईली फ़ौज के वहशियाना हमलों की शदीद अलफ़ाज़ में मुज़म्मत करते हुए सलामती कौंसिल और जिनेवा में क़ायम इंसानी हुक़ूक़ कौंसिल पर ज़ोर दिया है कि वो फ़लस्तीनीयों के ख़िलाफ़ इसराईली

सऊदी अरब की हुकूमत ने फ़लस्तीनी शहर ग़ाज़ा की पट्टी पर क़ाबिज़ इसराईली फ़ौज के वहशियाना हमलों की शदीद अलफ़ाज़ में मुज़म्मत करते हुए सलामती कौंसिल और जिनेवा में क़ायम इंसानी हुक़ूक़ कौंसिल पर ज़ोर दिया है कि वो फ़लस्तीनीयों के ख़िलाफ़ इसराईली जारहीयत बंद कराने के लिए अपनी ज़िम्मेदारीयां अदा करें।

नायब वज़ीरे आज़म और वली अहद शहज़ादा सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ की ज़ेरे सदारत काबीना के हफ़्तावार इजलास में ग़ाज़ा पर इसराईली बमबारी की शदीद मुज़म्मत की गई।

इजलास में कहा गया कि ग़ाज़ा की पट्टी पर इसराईली फ़ौज के वहशियाना हमलों में मासूम शहरीयों का क़त्ले आम किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, लिहाज़ा रियाज़ आलमी सलामती कौंसिल और इंसानी हुक़ूक़ कौंसिल से पुर ज़ोर मुतालिबा करता है कि वो चौथे जिनेवा मुआहिदे के तहत फ़लस्तीनीयों के ख़िलाफ़ के ख़िलाफ़ इसराईली जंगी जराइम की रोक थाम के लिए मोअस्सर किरदार अदा करें।

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