Sunday , September 23 2018

सलामती कौंसिल में इस्लाहात का फ़ैसलाकुन साल – हिंदुस्तान

हिंदुस्तान ने अक़वामे मुत्तहिदा से कहा है कि 2015 वो साल है जो सलामती कौंसिल में इस्लाहात के लिए जिस में काफ़ी ताख़ीर हो चली है, फ़ैसलाकुन इक़दामात का मुतक़ाज़ी है, और ज़ोर दिया कि बामक़सद पेशरफ़्त के लिए जामे मुसव्वदा पर मुज़ाकरात शुरू की जा

हिंदुस्तान ने अक़वामे मुत्तहिदा से कहा है कि 2015 वो साल है जो सलामती कौंसिल में इस्लाहात के लिए जिस में काफ़ी ताख़ीर हो चली है, फ़ैसलाकुन इक़दामात का मुतक़ाज़ी है, और ज़ोर दिया कि बामक़सद पेशरफ़्त के लिए जामे मुसव्वदा पर मुज़ाकरात शुरू की जाएं।

बैन हुकूमती मुज़ाकरात (आई जी एन) का ग्यारहवांरा साबिक़ा अदवार की मानिंद नहीं होना चाहीए जहां किसी मुसव्वदे के बगै़र ग़ौरो ख़ौज़ होता रहा और कोई नतीजा अख़ज़ ना किया जा सका, सफ़ीर भगवंत बिश्नोई ने ये बात कही, जो कारगुज़ार मुस्तक़िल नुमाइंदा बराए अक़वामे मुत्तहिदा हैं।

उन्हों ने कहा कि 2015 संगे मेल साल है क्योंकि ये यू एन के 70वीं साल की तकमील का मौक़ा है। इस मौक़ा पर रुक्न ममलकतों की ज़बरदस्त अक्सरीयत ने आई जी एन चेयर पर ज़ोर दिया कि मुज़ाकरात की शुरूआत में कोई ठोस मतन भी पेश किया जाए।

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