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सहाबी रसूल ऐ हज़रत आसम ओ बिन अज़ीम एल्मर तिब्बत मुजाहिद

हैदराबाद १९मार्च:रसूल अल्लाह ई के सहाबा साहिबान तसर्रुफ़ हैं कि जिन के ईमान, तक़वा, तवक्कुल, मुहब्बत ख़ुदा-ओ-रसूल ई और राह-ए-हक़ में हर चीज़ क़ुर्बान कर देने के सच्चे जज़्बों के जलवे रहती दुनिया तक बाक़ी-ओ-बरक़रार रहेंगे और अहल सआदत

हैदराबाद १९मार्च:रसूल अल्लाह ई के सहाबा साहिबान तसर्रुफ़ हैं कि जिन के ईमान, तक़वा, तवक्कुल, मुहब्बत ख़ुदा-ओ-रसूल ई और राह-ए-हक़ में हर चीज़ क़ुर्बान कर देने के सच्चे जज़्बों के जलवे रहती दुनिया तक बाक़ी-ओ-बरक़रार रहेंगे और अहल सआदतके क़ुलूब को दीन से हक़ीक़ी वाबस्तगी का अमली दरस देते रहेंगी। ऐसी बेशुमार मिसालों में हज़रत आसिम बिन साबतओ की शहादत और मा बाद शहादत उन की दुआ की क़बूलीयत का वाक़िया है जो उन के सैफ ज़बान होने पर दाल ही। सहाबी रसूल मक़बोलऐ हज़रत आसमओ ने दुआ की थी कि जब वो शहादत पा लें तो उन के जसद को कोई मुशरिक ना छू सकी। वाक़िया रजीव में जब उन्हों ने जाम शहादत नोश कर लिया तो मुशरिकीन ने जब उन की लाश की तरफ़ आगे बढ़ना शुरू किया तो करिश्मा क़ुदरत देख कर दंग रह गए कि इन के जसद के अतराफ़ हज़ारों शहद की मक्खियां भिनभिना रही हैं और उन की लाश से लिपटी हुई किसी को भी नज़दीक आने और उन्हें छूने से रोक रही हैं ।

ऐसी ज़ोरदार बारिश हुई कि सेलाब सा उमड आया और इसी के बहाओ में इन की लाश को बहा कर मुशरिकीनके नापाक हाथों से हमेशा के लिए महफ़ूज़ फ़र्मा दिया। डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीद उद्दीन शरफ़ी डायरेक्टर आई हरक ने आज सुबह ९ बजे ऐवान ताज उलार फा-ए-हमीदा बाद वाक़्य शरफ़ी चमन ,सब्ज़ी मंडी और ग्यारह बजे दिन जामि मस्जिद महबूब शाही , मालाकनटा रोड,रूबरू मुअज़्ज़म जाहि मार्किट में इस्लामिक हिस्ट्री रिसर्च कौंसल इंडिया (आई हरक) के ज़ेर-ए-एहतिमाम मुनाक़िदा९८२वीं तारीख़ इस्लाम इजलास के अली उल-तरतीब पहले सैशन में अहवाल अनबया-ए-अलैहिम अस्सलाम के तहत हज़रत मूसा अलैहि अस्सलाम केअहवाल मुक़द्दसा और दूसरे सैशन में एक मुहाजिर एक अंसारी सिलसिला के ज़िमन में सहाबी रसूल अललहऐ हज़रत आसमओ बिन साबित के हालात मुबारका पर तो सेवी लकचर दिये।

करा-ए-त कलाम पाक, हमद बारी ताला,नाअत शहनशाह कौनैन ऐसे कार्रवाई का आग़ाज़ हुआ। एक आयत जलीला के तफ़सीरी, एक हदीस शरीफ़ के तशरीही और एकफ़िक़ही मसला के तोज़ीही मुतालआती मवाद की पीशकशी के बाद डाक्टर सय्यद मुहम्मदहसीब उद्दीन हमीदी जवाईंट डायरेक्टर आई हरक ने इंग्लिश लेक्चर सीरीज़ के ज़िमन में हयात तीबहऐ के मुक़द्दस मौज़ू पर अपना ७३२ वां सिलसिला वार लकचर दिया। अह्ले इल्महज़रात और बाज़ौक़ सामईन की कसीर तादाद मौजूद थी। डाक्टर हमीद उद्दीन शरफ़ी ने सिलसिला कलाम को जारी रखते होई कहा कि हज़रत आसमओ ने ग़ज़ोइआ बदर के मौक़ा पर मुसाफ़ा और जलास नामी दो क़ुरैशियों को क़तल कर के वासिल जहन्नुम किया था जिन की माँ ने इस वाक़िया के बाद ये नज़र मानी थी कि हज़रत आसमओ के कासा सर में शराब डाल कर पिएगी ता कि इस का जज़बा इंतिक़ाम ठंडा हो इस औरत का नाम सलाफ़ा बिंत साद था वो हर क़ीमत पर हज़रत आसमओ का सर चाहती थीता कि इस के बेटों के क़तल का बदला हो और इस की नज़र पूरी हो सके । डाक्टर हमीद उद्दीन शरफ़ी ने कहा कि हज़रत आसमओ बिन साबित का ताल्लुक़ मदीना मुनव्वरा के मशहूर क़बीला ओस से था उन की कुनिय्यत अब्बू सुलेमान थी उन्हों ने क़बल हिज्रत दौलत ईमान पाई थी वो बड़े रासिख़ उल-अक़ीदा, मुस्तक़िल मिज़ाज, पर अज़म, शजीअ और माहिर हर्ब थी।

रसूल अललहऐ ने हज़रत आसमओ की सरकर्दगी में दस मुस्लमानों के एक वफ़द को बनी अज़लऔर बनी कारा के लोगों की इस ख़ाहिश-ओ-दरख़ास्त यानी हम इस्लाम रखते हैं हमारे क़बीला की दीनी तालीम और इस्लाह के लिए अपने अस्हाब में से किसी को भेजिए इस पर हुज़ूर अकऱ् मुइ ने एक जमात को इस ग़रज़ के लिए हज़रत आसमओ के साथ भेजा था। हालां कि बनी अज़ल-ओ-कारा के लोगों ने उन की और उन के साथीयों की हिफ़ाज़त करने का वाअदा कियाथा लेकिन उन्हों ने अह्द को तोड़ दिया और हज़रत आसमओ को शहीद कर डाला। ग़ज़वा अह्द के बाद रजीव के मुक़ाम पर ये वाक़िया पेश आया।इजलास केइख़तताम से क़बल बारगाह रिसालत ई में सलाम ताज अलारफ़ाइऒ पेश किया गया ज़िक्र जुहरी और दाये सलामती पर आई हरक की९८२वीं तारीख़ इस्लाम के दोनों सैशन तकमीलपज़ीर होई।अल्हाज मुहम्मद यूसुफ़ हमीदी ने इबतदा-ए-में ख़ौरमक़दम किया और जनाब मुहम्मद मज़हर हमीदी ने आख़िर में शुक्रिया अदा किया।

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