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सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल : नारायणचंद्र आचार्य नाम के शख्स ने अपने आवास में मंदिर और मस्जिद दोनों बनवाए

कोलकाता : सांप्रदायिक सौहार्द्र की एक अनोखी मिसाल बंगाल के झारगाम में देखने को मिलती है। जहां एक शख्स ने अपने घर में मंदिर के साथ ही मस्जिद का भी निर्माण करवाया और हर दिन यहां मृत्युंजय मंत्र के साथ ही कुरान साथ में सुन सकते हैं वह भी बिना किसी परेशानी के।

झरगाम के नंबर 10 घोराधरा टाउनशिप एरिया में यह दुर्लभ वाकया देखने को मिल सकता है। यहां बीते 23 सालों से 78 वर्षीय नारायणचंद्र आचार्य नाम के शख्स ने अपने सरकारी आवास में मंदिर और मस्जिद दोनों बनवा रखे हैं। साल 1986 में नारायणचंद्र ने घर में शिवमंदिर बनवाया था। बाद में वह एक मुस्लिम पीर से काफी प्रभावित हुए जो कि 1994 में दिवंगत हो गए। मुस्लिम पीर की आखिरी इच्छा का सम्मान करने के लिए आचार्य ने शिवलिंग के पास में ही उनकी मज़ार बनवाई। आचार्य इलेक्रिट्रिसिटी डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं।

एक इंटरव्यू में नारायणचंद्र ने कहा कि यहां किसी तरह का धार्मिक विवाद नहीं होता है। हिंदू और मुस्लिम यहां एक साथ आते हैं और कुरान पढ़ते हैं, यज्ञ करते हैं। जो लोग सांप्रदायिक सद्भाव की बातें करते हैं उन्हें यहां आना चाहिए और जानना चाहिए कि असल में इसका मतलब क्या होता है।

साल 1972 में आचार्य फुरफुरा शरीफ गए और वहां उनकी मुलाकात हजरत सईद गुलाम चिश्ती से हुई। यह पीर संस्कृत में गीता, वेद और उपनिषद पढ़ते थे। पीर ने ही नारायणचंद्र को बताया कि वेद और कुरान सब एक जैसे हैं, इन सब में प्यार और सद्भाव की बातें ही कही गई हैं। पीर बाबा की इसी बात से आचार्य काफी प्रभावित हो गए।

बता दें कि पूरे झरगाम में यही एक मजार और दरगाह है। लेकिन आचार्य का कहना है कि कभी भी मुख्यमंत्री ने यहां का दौरा नहीं किया जबकि वह कई बार यहां से 50 मीटर की दूरी पर झरगाम स्टेडियम आ चुकी हैं।

आचार्य हालांकि इस मंदिर-मस्जिद के भविष्य को लेकर काफी आशंकित हैं। उनका कहना है कि अभी मैं किसी भी तरह इसे चला रहा हूं लेकिन जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूंगा तो इसकी देखभाल कौन करेगा?

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