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साउथ चाइना सी की निगरानी तस्वीरें जारी, बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव

फिलीपींस में एक अखबार द्वारा प्राप्त निगरानी तस्वीरें बताती हैं कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में सेना के लिए प्रतिष्ठानों की एक बेल्ट कैसे बनाई है । समाचार संगठन ने इस शक्ति को एक ‘अप्रतिबंधित’ शो के रूप में वर्णित किया है। फिलीपीन डेली इन्क्वायरर के मुताबिक, 2017 के अंतिम छः महीनों में 1500 मीटर (4,920 फीट) की ऊंचाई से ली गई तस्वीरों से पता चलता है की कैसे चीन ने अपना सैनिक बेड़ा का निर्माण किया है।

तस्वीरों में मिसाइल फ्रिगेट्स, अवलोकन टॉवर और कंक्रीट हेलीपैड सहित विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों को दिखाया गया है। दक्षिण पूर्व एशियाई विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को कहा है की दक्षिण चीन सागर में चीन की लगातार सुधार ने प्रतिद्वंद्वी दावेदारों में भरोसा कम कर दिया है और अब क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है। बीजिंग ने लगभग सभी जलमार्ग पर दावा किया है और इसे द्वीपों में बदल दिया है और उन पर रनवे और उपकरण जैसे सैन्य सुविधाओं को स्थापित किया है।

आसियान के सदस्य मलेशिया, ब्रुनेई, फिलीपींस और वियतनाम तथा ताइवान के पास जलमार्ग में आंशिक दावे भी हैं। तीन सबसे बड़ी चट्टानों पर, कागीटिंगन, पेंग्नीबैन और ज़मोरा, सैन्य विमानों को प्राप्त करने के लिए रनवे तैयार थे। दिसंबर में चीन ने विवादित द्वीपों पर इसके निर्माण का बचाव किया था, क्योंकि अमेरिका के रडार और अन्य उपकरणों की तैनाती से नए उपग्रह से छवियां जारी कीं थी।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा लॉन्च किए जाने वाले विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना एशिया, अफ्रीका और यूरोप के माध्यम से देशों में व्यापार के विस्तार के लिए बंदरगाहों, रेलवे और सड़कों के ‘नया सिल्क रोड’ का निर्माण करने के लिए तैयार है।

आपको बता दें की साउथ चाइना सी दक्षिणी-पूर्वी एशिया से प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे तक स्थित है। इसमें करीब 1.4 मिलियन स्क्वेयर एक धरातल है और साथ ही चट्टानों का संग्रह, द्वीप और प्रवाल द्वीप के अलावा छोटे द्वीपों का समूह, पार्सेल द्वीप समूह और स्कारबोरो शोल हैं।

साउथ चाइना सी पूर्वी एशियाई देशों के बीच दशकों से तनाव का स्रोत बना हुआ है। हाल के वर्षों में चीन और उसके कुछ पड़ोसी देशों ने इस इलाके पर दावा करने के लिए यहां गतिविधियां शुरू कर दीं। यहां इन्होंने नए द्वीप और फाइटर के साथ सर्विलांस जेट्स के लिए हवाई पट्टी का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। साउथ चाइना सी में चीन की सैन्य गतिविधियों से अमेरिका के कान खड़े हो गए। अमेरिका ने इस पर सख्त आपत्ति जतायी और इसके बाद से दोनों देशों को बीच रिश्तों में भारी तनाव आ गया।

साउथ चाइना सी कई दक्षिणी-पूर्वी एशियन देशों से घिरा है। इनमें चीन, ताइवान, फिलीपीन्स, मलयेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम हैं। ये सभी देश साउथ चाइना सी पर अपने-अपने दावे कर रहे हैं। 1947 में चीन ने एक मैप के जरिए सीमांकन कर दावा पेश किया था। यह सीमांकन काफी व्यापक था और उसने लगभग पूरे इलाके को शामिल कर लिया। इसके बाद कई एशियाई देशों ने चीन के इस कदम से असहमति जताई। वियतनाम, फिलीपीन्स और मलयेशिया ने भी कई द्वीपों पर दावा किया। वियतनाम ने कहा कि उसके पास जो मैप है उसमें पार्सेल और स्प्रैटली आइलैंड्स प्राचीन काल से उसका हिस्सा है। इसी तरह ताइवान ने भी दावा किया।

साउथ चाइना सी दुनिया का बेहद अहम व्यापार मार्ग है। इस इलाके से हर साल कम से कम 5 ट्रिलियन डॉलर के कमर्शल गुड्स की आवाजाही होती है। इस इलाके के बारे में कहा जाता है कि यहां तेल और गैस का विशाल भंडार है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के अनुमान के मुताबिक यहां 11 बिलियन बैरल्स ऑइल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस संरक्षित है।

सीएसआईएस के मुताबिक साउथ चाइना सी के मिसचीफ रीफ के सबसे बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा है। एक अनुमान के मुताबिक यह 60 मिलियन स्क्वेयर फीट है। पिछले साल सितंबर में ली गई सेटलाइट इमेज के मुताबिक चीन ने यहां जमीन से हवा में दगने वाली हाई-फ्रीक्वेंसी रेडार मिसाइलों की भी तैनाती की है। पार्सल आईलैंड्स पर दावों को लेकर वियतनाम और चीन में घोर प्रतिस्पर्धा की स्थिति है। इन दोनों के बीच 1974 और 1988 में मिलिटरी संघर्ष भी हो चुका है।

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