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साबिक़ कांस्टेबल अबदुलक़दीर अलील, हॉस्पिटल में ज़ेर-ए-इलाज

हैदराबाद२८। मार्च । 12 डसमबर 1990 -ए-यानी पूरे 21 सिल के तवील तरीन अर्सा से क़ैद-ओ-बंद की सऊबतें बर्दाश्त कर रहे साबिक़ कांस्टेबल अबदुलक़दीर को मर्ज़ मेंग़ैरमामूली इज़ाफ़ा के सबब गांधी हॉस्पिटल मुंतक़िल करदिया गया । तफ़सीलात के मुताब

हैदराबाद२८। मार्च । 12 डसमबर 1990 -ए-यानी पूरे 21 सिल के तवील तरीन अर्सा से क़ैद-ओ-बंद की सऊबतें बर्दाश्त कर रहे साबिक़ कांस्टेबल अबदुलक़दीर को मर्ज़ मेंग़ैरमामूली इज़ाफ़ा के सबब गांधी हॉस्पिटल मुंतक़िल करदिया गया । तफ़सीलात के मुताबिक़ कांस्टेबल अबदुलक़दीर पिछले एक महीना से चरला पली जेल के दवाख़ाना में ज़ेर-ए-इलाज थे लेकिन रोज़ अफ़्ज़ूँ मर्ज़ में शिद्दत पैदा हो गई जिस की बिना पर वहां के डाक्टरों के मश्वरे से उन्हें 19 मार्च को गांधी हॉस्पिटल भेज दिया गया है ।

साबिक़ कांस्टेबल पैरों में सूजन , ब्लड प्रैशर और शूगर जैसे कई एक मर्ज़ में मुबतला हैं। इन की शूगर 500 तक पहुंच चुकी है । नीज़ पैर में एक ज़ख़म होने की वजह से शदीद तकलीफ़ से दो-चार हैं जिस की वजह से वो फ़िलहाल चल फिर भी नहीं पारहे हैं। पुलिस ने उन की शरीक-ए-हयात को साथ रह कर ख़िदमत करने की इजाज़त देदी है । अबदुलक़दीर ने बताया कि मैं इतनी शदीद तकलीफ़ और दर्द महसूस कर रहा हूँ जिस का इज़हार भी नामुमकिन है ।

ये कहते हुए अबदुलक़दीर की आँखें अशकबार होगईं। मज़ीद उन्होंने कहा कि मैं हुकूमत से मुतालिबा करता होंका इतने लंबे ज़माने से मैं जेल की दुश्वारियां झील रहा हूँ, मेरी मौजूदा हालत के पेशे नज़र और इंसानियत के तक़ाज़ा से मुझे रिहाई दी जानी चाहीए ताकि में ज़िंदगी के बाक़ी चंद लमहात अपने अफ़राद ख़ानदान के साथ गुज़ार सकूं । वाज़िह रहे कि अबदुलक़दीर गुज़श्ता 8 फरवरी को अपनी दुख़तर की शादी के मौक़ा पर पेरोल पर 10 दिन की छुट्टी पर घर आए थे । जेल वापिस जाने के बाद से ही उन की तबीयत बिगड़ गई जो सुधरने का नाम नहीं ले रही है ।

साबिक़ कांस्टेबल के मुताबिक़ दवाख़ाना से उन्हें किसी तरह का तआवुन नहीं मिल रहा है । यौमिया 1000 रुपय की दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है । उन्हों ने अख़बार सियासत के ज़रीया दवाख़ाना इंतिज़ामीया से अपील की है कि इन के ईलाज पर ख़ुसूसी तवज्जा दी जाई।

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