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सामूहिक बलात्कार पर पार्लीमेंट में शदीद गुस्से का इज़हार

नई दिल्ली, 19 दिसंबर: (पीटीआई) पार्लीमेंट ने जुनूबी दिल्ली में गुज़शता रोज़ चलती बस में एक लड़की की इजतिमाई इस्मतरेज़ि के शर्मनाक और बरबरीयत अंगेज़ वाक़िया पर शदीद ग़म-ओ-ग़ुस्सा का इज़हार किया है और मुतालिबा किया कि इस किस्म के सफ़ाकाना जरा

नई दिल्ली, 19 दिसंबर: (पीटीआई) पार्लीमेंट ने जुनूबी दिल्ली में गुज़शता रोज़ चलती बस में एक लड़की की इजतिमाई इस्मतरेज़ि के शर्मनाक और बरबरीयत अंगेज़ वाक़िया पर शदीद ग़म-ओ-ग़ुस्सा का इज़हार किया है और मुतालिबा किया कि इस किस्म के सफ़ाकाना जराइम के ख़ातियों को सज़ाए मौत दी जानी चाहीए।

इस संगीन वाक़िया पर पार्लीमेंट के दोनों ऐवान दहल गए। लोक सभा और राज्य सभा में तमाम जमातों के अरकान ने क़ौमी दार-उल-हकूमत में जहां अमन-ओ-क़ानून मर्कज़ी वज़ारत-ए-दाख़िला की रास्त निगरानी में है, गहरी तशवीश का इज़हार किया।

अपोज़ीशन अरकान ने वज़ीर-ए-दाख़िला से ये वाज़िह तयक्कुन देने का मुतालिबा किया कि मुस्तक़बिल में इस किस्म के वाक़ियात का इआदा नहीं होगा। इस वाक़िया की मुज़म्मत पर दोनों ऐवानों में ख़ातून अरकान सबसे आगे रहीं, जिन्होंने दिल्ली में सिनफ़ नाज़ुक के तहफ़्फ़ुज़-ओ-सलामती पर गहरी तशवीश का इज़हार किया।

मुमताज़ क़ानूनदां और राज्य सभा के रुकन राम जेठमलानी इस सफ़ाकाना जराइम को रोकने में नाकामी पर दिल्ली पुलिस सरबराह की बरतरफ़ी का मुतालिबा किया। दोनों ऐवानों में ख़ातून अरकान ने कहा कि इस्मत रेज़ि के बरबरीयत अंगेज़ वाक़ियात ने ख़वातीन को ज़िंदा लाशों में तबदील कर दिया है।

चुनांचे ऐसे जराइम के ख़ातियों के लिए सज़ाए मौत ज़रूरी है। एस पी की रुकन जया बच्चन जो दिल्ली में ख़वातीन के मसला पर इज़हार-ए-ख़्याल का मौक़ा ना दिए जाने पर ऐवान में बतौर‍ ए‍ एहतिजाज खड़ी रही थीं कहा कि इस्मत रेज़ि को भी क़त्ल के मुतरादिफ़ क़रार दिया जाए और हिंदूस्तानी ताज़ीरी क़ानून की दफ़ा 307 में तरमीम के ज़रीया क़त्ल के साथ इस्मत रेज़ि को भी शामिल किया जाए।

जया बच्चन ने गुलूगीर आवाज़ में कहा कि मुझे बहुत सदमा हुआ है और सख़्त तकलीफ़ पहूँची है। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक और ब्रायन ने कहा कि ऐवान में जब वो इस मसला पर इज़हार-ए-ख़्याल कर रहे थे तो एक 17 साला लड़की के वालिद की हैसियत से काफ़ी परेशान और फ़िक्रमंद भी थे क्योंकि दिल्ली अब इस्मत रेज़ि का सदर मुक़ाम बन गया है।

उन्होंने कहा कि ये महज़ ख़वातीन का मसला ही नहीं है। ये मर्दों का मसला भी है। मर्दों ने अब इंसानों जैसा तौर पर तरीक़ा तर्क कर दिया है और जानवरों जैसा रवैय्या इख्तेयार कर लिया है बल्कि वो (मर्द) जानवरों से भी बदतर हो गए हैं। बी जे पी को माया सिंह ने शिंदे पर तन्क़ीद करते हुए कहा कि इस्मत रेज़ि के वाक़ियात से सवाल उठने लगा है कि यहां क़ानून की हुक्मरानी है या ग़ुंडों का राज है।

उन्हों ने कहा कि (इजतिमाई इस्मत रेज़ि का) ये वाक़िया किसी गोया जंगल में नहीं बल्कि जुनूबी दिल्ली में 90 मिनट तक जारी रहा। उसकी ज़िम्मेदारी कौन कुबूल करेंगे। आप (शिंदे) या दिल्ली की चीफ़ मिनिस्टर ? आप दिल्ली पुलिस के निगरां हैं। माया सिंह ने कहा कि ऐवान को ये क़रारदाद मंज़ूर करना चाहीए कि कोई भी वकील ऐसे जराइम के मुल्ज़िमीन के मुक़द्दमा की पैरवी ना करें।

बी जे पी के वैंकया नायडू ने कहा कि इस किस्म के इंतिहाई शर्मनाक वाक़ियात को रोकने के लिए मज़बूत सयासी अज़म की ज़रूरत है। महलूक के लिए ताज़ियत और ज़िंदा बच जाने वालों के लिए मुआवज़ा की पालिसी नहीं होनी चाहीए। मिस्टर वैंकया नायडू ने जो वज़ारत-ए-दाख़िला की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन भी हैं, कहा कि जब कभी ऐसे वाक़ियात पेश आते हैं हुकूमत बेबस नज़र आती है।

क्या कोई हुकूमत भी है और क्या किसी निज़ाम का वजूद भी है। वज़ीर-ए-दाख़िला को अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी कुबूल करना चाहीए। सी पी आई (एम) के प्रशांत चटर्जी ने कहा कि नाक़ाबिल गुमान बरबरीयत वाक़िया एक बस में ऐसे मुक़ाम पर पेश आया जहां से तीन पी सी आर गाड़ियां गुज़र रही थीं।

किसी भी मुक़ाम पर पुलिस नहीं थी। एक टेलीविज़न फूटेज में दिखाए गए मंज़र से पता चलता है कि सारे रास्ता में कहीं भी पुलिस नहीं थी। कांग्रेस की रुकन रेनूका चौधरी ने कहा कि ये एक दूसरे पर इल्ज़ाम तराशी और अंगुश्तनुमाई का वक़्त नहीं है बल्कि बताया जाए कि इजतिमाई ज़िम्मेदार कौन हैं।

ये हमारे समाज की इजतिमाई नाकामी है। क़ब्लअज़ीं सुषमा स्वराज ने कहा कि दिल्ली में इस किस्म के वाक़ियात इंतिहाई क़ाबिल-ए-मुज़म्मत हैं क्योंकि ये मर्कज़ी हुकूमत का पाएतख़्त है और एक ख़ातून रियासत दिल्ली की चीफ़ मिनिस्टर हैं।

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