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सालाना 5 लाख तनख़्वाह पर इनकम टैक्स रिटर्न दाख़िल करने की ज़रूरत नहीं

सालाना 5 लाख रुपये तक आमदनी रखने वाले तनख़्वाह याब मुलाज़मीन को इस साल से इनकम टैक्स दाख़िल करने की ज़रूरत नहीं होगी। वज़ारत फ़ीनानस ( फाइनेंस) के आलामीया में ये बात बताई गई। मुल्क भर में 85 लाख तनख़्वाह याब अफ़राद हैं जिनकी सालाना आमदन

सालाना 5 लाख रुपये तक आमदनी रखने वाले तनख़्वाह याब मुलाज़मीन को इस साल से इनकम टैक्स दाख़िल करने की ज़रूरत नहीं होगी। वज़ारत फ़ीनानस ( फाइनेंस) के आलामीया में ये बात बताई गई। मुल्क भर में 85 लाख तनख़्वाह याब अफ़राद हैं जिनकी सालाना आमदनी बैंक डिपाज़िटस के बिशमोल दीगर वसाइल से हासिल होने वाली आमदनी 5 लाख से तजावुज़ ना करती हो।

वज़ारत फ़ीनानस ( फाइनेंस) के आलामीया में बताया गया है कि एक तनख़्वाह याब मुलाज़िम जिसकी मुकम्मल आमदनी सालाना 5 लाख से तजावुज़ ना करे और इसकी आमदनी सिर्फ़ तनख़्वाह के तहत इनकम टैक्स के लिए काबिल इतलाक़ इनकम चार्जस पर मुश्तमिल हो और दीगर वसाइल से भी इसकी आमदनी हो जैसे बैंक में सेविंग एकाउंटस से हासिल होने वाले सूद जो 10 हज़ार से ज़ाइद ना हो वो साल 2012 13 से इनकम टैक्स रिटर्न दाख़िल करने से मुस्तसना रहेगा।

इनकम टैक्स दाख़िल करने से इस्तिस्ना की इजाज़त सिर्फ उस शख़्स को हासिल होगी जिसने अपने आजिर से फ़ार्म 16 में टैक्स के मिनहा का सरटीफ़ीक हासिल क्या हो। ताहम इनकम टैक्स की बाज़याबी के इद्दिआ के लिए इस तरह के अफ़राद को इनकम टैक्स रिटर्न दाख़िल करना होगा।

इस आलामीया से क़बल तमाम तनख़्वाह याब अफ़राद के लिए क़ानूनी तौर पर ज़रूरी था कि वो इनकम टैक्स ऐक्ट 1961-ए-के तहत अना इनकम टैक्स रिटर्न दाख़िल करे। फ़िलहाल 1.80-5 तक 10 फ़ीसद टैक्स 5-8 लाख सालाना आमदनी पर 20 फ़ीसद टैक्स और 8 लाख आमदनी पर 30 फ़ीसद टैक्स आइद है।

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