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साल भर से नहीं मिला है तंख्वाह, रियासत के 75 इंजीनियरों ने छोड़ दिया काम

रांची: झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अॉथोरिटी में ठेका पर काम कर रहे करीब 75 इंजीनियरों ने काम छोड़ दिया है। धीरे-धीरे दीगर इंजीनियर भी काम छोड़ते जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें करीब साल भर से तंख्वाह नहीं मिला है। अभी भी 125 इंजीनियर बिना तंख्वाह के ही खट रहे हैं। उन्हें तंख्वाह देने की फायल ही नहीं बढ़ रही है। इससे उनकी इक़्तेसादी हालत भी खराब हो गयी है।

जानकारी के मुताबिक इन इंजीनियरों की तकर्रुरी तीन साल पहले वजीरे आजम ग्राम सड़क मंसूबा के अमल के लिए की गयी थी। तब करीब 150 जूनियर व 50 एसिस्टेंस इंजीनियरों को तंख्वाह पर रखा गया था। इनके ही जरिये से पीएमजीएसवाइ का काम हो रहा था। बाद में इनका तंख्वाह बंद कर दिया गया। इंजीनियर दौड़ते रहे, पर उनकी मसला हल नहीं हुई। हालांकि वे काम करते रहे। काफी वक़्त बाद तंख्वाह नहीं मिलने से इंजीनियरों ने काम छोड़ना शुरू किया। इस दौरान करीब 50 जूनियर इंजीनियर व 25 एसिस्टेंस इंजीनियरों ने काम छोड़ा।

इंजीनियरों ने तंख्वाह के मामले पर वजीरे आला से भी मुलाकात की थी। वजीरे आला ने इस मामले में फौरन कार्रवाई करते हुए उनकी मसला का निबटारा करने को कहा था, पर उनके हिदायत के बाद भी सुरते हाल जस की तस है। इधर, रियासत भर में पीएमजीएसवाइ पर ग्रहण लग गया है। एक तो मंसूबा के लिए पैसे नहीं हैं। अगर काम होता भी हो, तो इंजीनियरों की बड़ी कमी हो गयी है। 75 इंजीनियरों के छोड़ने का असर पूरी मंसूबा पर पड़ेगा।

बीच में हेड क्वार्टर ने कोशिश कर वहां तकर्रुर कुछ इंजीनियरों को तंख्वाह के तौर में एक माह की रकम अदायगी करायी। इसके लिए जिले को भी लिखा गया, लेकिन गुमला, सिमडेगा समेत दीगर जिलों ने इस पर बोहरान खड़ा कर दिया है। इन जिलों ने लिखा है कि उनके यहां पीएमजीएसवाइ का काम नहीं है। ऐसे में उन्हें इंजीनियरों की जरूरत नहीं है।

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