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सिमी के मारे गए सदस्य अंडर ट्रायल थे, फिर मीडिया उन्हें आतंकी क्यों कह रही है

भोपाल के बाहरी इलाक़े ईंटखेड़ी में सिमी के आठ कार्यकर्ताओं का एनकाउंटर फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय है। 3 बजे तड़के आठ भोपाल सेंट्रल जेल से एक साथ आठ कैदियों का भागा जाना फिर एक साथ ही इनका एनकाउंटर होना कई सवाल खड़े करता है। ट्वीटर पर यह एनकाउंटर टॉप ट्रेंड कर रहा है। इसके साथ ही कांग्रेस, आप नेताओं के अलावा पत्रकार और सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं ने इसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश पुलिस का कहना था कि आठों सिमी कार्यकर्ता रविवार रात 2-3 बजे के बीच भोपाल सेंट्रल जेल से फ़रार हुए थे।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर शक़ ज़ाहिर करते हुए पूछा है, ‘सरकारी जेल से भागे हैं या किसी योजना के तहत भगाये गये हैं? जांच का विषय होना चाहिये. दंगा फ़साद ना हो, प्रशासन को नज़र रखना पड़ेगा.’

दिग्विजय सिंह ने इस कार्रवाई से जुड़े कुल चार ट्वीट किए. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘सिमी और बजरंग दल पर मैंने प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश तत्कालीन एनडीए सरकार से की थी. उन्होंने सिमी पर तो लगा दिया बजरंग दल पर नहीं लगाया.।

आम आदमी पार्टी की चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने कहा है, ‘आतंकी मारे गए, अच्छा हुआ, 8 आतंकियों का एक साथ भागना, फिर कुछ घंटों बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना. सरकार के पास ‘व्यापम’ फार्मूला भी था.’

वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने लिखा है, ‘संदिग्ध आतंकियों का एक साथ जेल से भागना और सबका एक साथ एक ही एक जगह पर एनकाउंटर हो जाना सबकुछ संदिग्ध है.’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘आतंकवादी’ 8 घंटे में सिर्फ़ 10 किमी भाग पाए? और उन्हें सेमी ऑटोमेटिक बंदूकें कहां से मिल गईं?’

कापड़ी ने इस एनकाउंटर के मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘प्रिय मीडिया, वे आतंकवादी थे या संदिग्ध आतंकी?’
इंडियन एक्सप्रेस के एसोसिएट एडिटर सुशांत सिंह ने लिखा है, ‘साबित कीजिए अगर मैं ग़लत हूं तो। सिमी के मारे गए सदस्य अंडर ट्रायल थे, अभी उन्हें सज़ा भी नहीं हुई थी। ठीक? फिर वे आतंकवादी कैसे बन गए?’
एपवा की सचिव कविता कृष्णन ने लिखा है, ‘धारदार चमचे’ के जवाब में गोली ज़रूरी थी? मध्यप्रदेश सरकार किसे बेवकूफ़ बना रही है’.
मजलिस के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी मीडिया से बातचीत में सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, भोपाल की हाई सिक्योरिटी जेल से इन आठ लोगों का भाग जाना, और भागने से पहले वहां पर एक सिक्योरिटी गार्ड को जान से मार देना और फिर 10 घंटे के बाद 10 किलोमीटर के अंदर एनकाउंटर हो जाना। अगर हम उनकी लाशें देखते हैं तो पैरों में जूते हैं, हाथों में घड़ी है, कलाई में बैंड और कमर में बेल्ट भी बंधी है। मगर जब भी कोई अंडरट्रायल होता है तो उनको ना तो जूते पहनने की इजाज़त होती है और ना ही बैंड या घड़ी लगा सकते हैं। वैसे भी इन सभी पर गंभीर आरोप थे।

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