Thursday , December 14 2017

सिमी को गैर कानूनी त‍ंज़ीम ऐलान किए जाने की तौसीक (पुष्टि)

जस्टिस वी के शाली ट्राइब्यूनल ने स्टूडेन्ट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) को गैर कानूनी त‍ंज़ीम(अवैध संगठन) ऐलान किए जाने की तौसीक कर दी है।

जस्टिस वी के शाली ट्राइब्यूनल ने स्टूडेन्ट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) को गैर कानूनी त‍ंज़ीम(अवैध संगठन) ऐलान किए जाने की तौसीक कर दी है।

ज़ुमा(शुक्रवार) को जारी सरकारी रिलीज़ (विज्ञप्ति) के मुताबिक ट्राइब्यूनल ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट मर्कज़ी वज़ारत दाखिला (केन्द्रीय गृह मंत्रालय) को सौंप दी। वज़ारत दाखिला (गृह मंत्रालय) ने इसी साल 03 फरवरी को नोटीफिकेशन (अधिसूचना) जारी कर सिमी को गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के तहत दो साल के लिए गैर कानूनी त‍ंज़ीम ऐलान किया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शाली की सदारत (अध्यक्षता) में ट्राइब्यूनल का कियाम (गठन) यह पता लगाने के लिए किया गया था कि क्या सिमी को गैर कानूनी त‍ंज़ीम ऐलान (अवैध संगठन घोषित) करने के मुनासिब (पर्याप्त/ उचित) बुनियाद (आधार) हैं। सिमी को 27 सितंबर 2001 को पहली मरतबा गैर कानूनी त‍ंज़ीम ऐलान किया गया था, इसके बाद से इस ऐलान की मियाद मुसलसल ( नियमित तौर पर) बढ़ाई जाती रही है।

पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तयबा और उसके भारतीय मोर्चा इंडियन मुजाहिदीन से संबंध रखने वाले सिमी का देश में कई आतंकवादी गतिविधियों में हाथ होने का शक (संदेह) है। सिमी ने सरकारी नोटीफिकेशन (अधिसूचना) का मुखालिफत (विरोध) करते हुए कहा था कि उसने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिसकी वजह से उसे गैर कानूनी त‍ंज़ीम ऐलान (अवैध संगठन घोषित किया जाए) ।

TOPPOPULARRECENT