Monday , November 20 2017
Home / AP/Telangana / सियासत की अपील का असर: बिहार सैलाब मुतास्सिरीन के लिए 10 लाख रुपये और एक लारी कपड़े जमा

सियासत की अपील का असर: बिहार सैलाब मुतास्सिरीन के लिए 10 लाख रुपये और एक लारी कपड़े जमा

हैदराबाद 05 अगस्त: इदारा-ए-सियासत की तरफ से क़ारईन सियासत-ओ-शहरयान हैदराबाद से बिहार के सैलाब मुतास्सिरीन के दरमयान इमदादी-ओ-राहत रसानी के कामों के आग़ाज़ के लिए की गई अपील पर बेहतर रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए हमेशा की तरह क़ारईन-ओ-शहरयान हैदराबाद ने दिल खोल कर तआवुन करना शुरू कर दिया है और बिहार सैलाब मुतास्सिरीन के लिए ताहाल 10लाख रुपये और ज़ाइद अज़ एक लारी कपड़े जमा हो चुके हैं। रुकने असेंबली कूचा दमन ज़िला किशनगंज बिहार मुजाहिद आलम ने एडिटर सियासत से राबिता क़ायम करते हुए बिहार के ग़रीब मुसलमानों की बाज़ आबादकारी के लिए आगे आने की ख़ाहिश की थी जिसके फ़ौरी बाद इदारा-ए-सियासत ने इस ज़िम्मेदारी की अंजाम दही के लिए हमेशा की तरह अपने क़ारईन-ओ-शहरीयों को सदा दी जिस पर अवाम ने लब्बैक कहते हुए बेहतरीन रद्द-ए-अमल ज़ाहिर किया और इस का सिलसिला अब भी जारी है।

किशनगंज के कई इलाक़े अब भी ज़ेरे आब हैं इन नशीबी इलाक़ों के मकीनों को हुकूमत की तरफ से ऊंचे मुक़ामात पर मौजूद सरकारी इमारतों में मुंतक़िल किया गया है जहां उन के लिए गज़ा का इंतेज़ाम किया जा रहा है लेकिन कई मुक़ामात एसे हैं जहां जमा पानी के सबब अब तक भी रसाई मुम्किन नहीं है।

बताया जा रहा है कि इन इलाक़ों में हेलीकाप्टर की मदद से ग़िज़ाई पैकेट्स पहुंचाए जा रहे हैं और बाज़ इलाक़ों में कश्तीयों के ज़रीये इमदाद पहुंचाने के इक़दामात किए जा रहे हैं।
बिहार सैलाब मुतास्सिरीन के लिए भी इदारा-ए-सियासत की तरफ से मुनज़्ज़म बाज़ आबादकारी के मन्सूबे पर ग़ौर किया जा रहा है और इस पर मुक़ामी ज़िम्मेदारों से मुशावरत की जाएगी ताकि किशनगंज की बुनियादी ज़रूरत को पूरा किया जा सके और इलाके की पसमांदगी को दूर करने में ये इक़दामात बेहतर साबित हूँ।

एडिटर सियासत ने बताया कि इब्तिदा में एक लारी कपड़े और फ़ौरी ज़रूरी अश्याय की तक़सीम-ए-अमल में लाई जाएगी और बादअज़ां मुक़ामी ज़िम्मेदारान से मुशावरत के बाद मुस्तक़बिल का लायेहा-ए-अमल तए किया जाएगा। सैलाब मुतास्सिरीन तक इमदाद रास्त ज़िम्मे दारान सियासत और फै़जे आम ट्रस्ट के ज़िम्मेदारान की निगरानी में पहुंचाई जाएगी।

TOPPOPULARRECENT