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सियासत मिल्लत फ़ंड से 48 गरीब तलबा के लिए APOSS फीस की अदाएगी

इल्म आदमी को हक़ीक़त में इंसान बनाता है। मुआशरा में उसे मुमताज़ मुक़ाम अता करता है। इल्म की दौलत से मालामाल अक़्वाम ज़िंदगी के हर शोबा में कामयाबी और कामरानी के झंडे गाड़ते हैं इस के बरअक्स इल्म जैसी अनमोल नेअमत से महरूम फ़र्रद या अक़्वाम की कोई क़दर और मंजिलत नहीं होती ना ही वो ज़माने में अपनी मौजूदगी, अहमियत और अफादियत का एहसास दिला सकते हैं।

दुनिया उन का बाआसानी इस्तेहसाल करती है। उन्हें अपना ताबे बनाए रखती है और उन्हें अपने इशारों पर नचाती है। ताहम इंसान अगर कोशिश और जुस्तजू करे तो कोई भी शय इस के लिए नामुमकिन नहीं रहती बल्कि नामुमकिन ख़ुद नामुमकिन हो जाता है। यानी मुम्किन हो जाता है।

हमारे शहर के कुछ ऐसे इलाक़ा हैं जहां मुसलमान इंतिहाई कसमपुर्सी की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। लड़के लड़कियां स्कूलों से दूर हैं, नौजवानों में बेरोज़गारी पाई जाती है। बेरोज़गारी के बाइस कुछ नौजवान बरी आदतों में भी मुबतला हो जाते हैं।

इन संगीन हालात के बावजूद हमें मायूस होने की ज़रूरत नहीं इस लिए कि जहां फूल होते हैं वहां कांटे भी ज़रूर पाए जाते हैं और हर मुसीबत के बाद राहत, नाकामी के बाद कामयाबी अपने मतवालों का इंतेज़ार करती है।

क़िला गोलकुंडा के इलाक़ा में काफ़ी पसमांदा बस्तियां हैं जिन में गरीब मुसलमानों की कसरत है। इन तलबा के शौक़ को देख कर अंदाज़ा हुआ कि हमारे शहर के पसमांदा इलाक़ों में रहने वाले बच्चों में सलाहियतों की कोई कमी नहीं सिर्फ़ उन्हीं सही रहनुमाई की ज़रूरत है।

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