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सिर्फ मुस्लिम दहश्तगरदी पर शक क्यों

हैदराबाद25 फरवरी: दिलसुखनगर बम धमाकों की तहकीकात क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली मुख़्तलिफ़ क़ौमी-ओ-रियासती एजेंसीयां अपने अपने अंदाज़ में कररही हैं। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजंसी के क़ियाम के बाद इस नवीत के केसिस की तहकीकात सिर्फ़ और सिर्फ़ उसी

हैदराबाद25 फरवरी: दिलसुखनगर बम धमाकों की तहकीकात क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली मुख़्तलिफ़ क़ौमी-ओ-रियासती एजेंसीयां अपने अपने अंदाज़ में कररही हैं। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजंसी के क़ियाम के बाद इस नवीत के केसिस की तहकीकात सिर्फ़ और सिर्फ़ उसी आला एजंसी के ज़रीये होनी चाहीए और इस के क़ियाम के लिए वज़ा करदा क़ानून में उस की गुंजाइश भी रखी गई है मगर ये देखा गया है कि ना सिर्फ़ कई क़ौमी तहक़ीक़ाती-ओ-खु़फ़ीया एजंसियां अपने अपने तौर पर तहकीकात कररही हैं बल्कि रियासती-ओ-शहरी सतह की भी क़ानून नाफ़िज़ करनेवाली एजंसियां मुतवाज़ी तौर पर केस की छानबीन करने लगी है और तहकीकात से मुताल्लिक़ मुख़्तलिफ़ एजंसियों के ओहदेदार राज़दाराना अंदाज़ में मुतज़ाद इत्तिलाआत-ओ-मालूमात का इन्किशाफ़ करने लगी हैं।

अगरचे मुख़्तलिफ़ एजंसियां अपने अपने अंदाज़ में शरपसंदों का सुराग़ लगाने में सरगरदां हैं मगर एसा लगता है कि ये तमाम एजंसियां पहले से ही ये मान कर चल रही हैं कि धमाका करने वाले मुस्लिम दहश्तगर्द हैं जबके ये बावर करवाने की कोशिश की जा रही है कि इस धमाके में भी इम्प्रोवाइज्ड एक्स्प्लोसिवे डिवाइस इस्तेमाल किया गया है और धमाकों माद्दा के तौर पर सोडियम नाईट्रेट का इस्तेमाल किया गया है।

मक्का मस्जिद, मालिगांव, अजमेर शरीफ़ और समझौता ट्रेन में भी जो धमाके हुए थे इन में भी यही तरीक़ कार इख़तियार किया गया था तो फिर सवाल ये पैदा होता है कि हमारी तहक़ीक़ाती एजंसियां हिनदूतवा दहश्तगरदों की कारस्तानी के इमकानात को क्यों नज़रअंदाज कररही हैं।

मीडिया के ज़रीये फ़राहम की जाने वाली इतेलाआत ज़ाहिर करती हैं कि मुख़्तलिफ़ तहक़ीक़ाती टीमें जेलों में महरूस मुस्लिम दहश्तगरदों से पूछगिछ शुरू करी हैं और इस ख़सूस में दहश्तगर्दी के इल्ज़ाम में माज़ी में गिरफ़्तार मगर अदालत से बरी मुस्लिम नौजवानों को भी तलब करते हुए उन्हें खंगाला जा रहा है। आया हमारे तहक़ीक़ाती ओहदेदार कितने मुश्तबा हिनदु नौजवानों से बाज़पुर्स की है और दहश्तगर्दी के इल्ज़ामात का सामना करने वाले जेल में महरूस कितने हिनदु मुल्ज़िमिन से पूछगिछ की गई? इब्तिदा से ही इंडियन मुजाहिदीन पर शक की सोई घुमाते हुए ये यक़ीन दिलाने की कोशिश की जा रही है कि ये कार्रवाई किसी मुस्लिम दहश्तगर्द ग्रुप की कारस्तानी है और इस सिलसिले में एक बार फिर उन्ही नौजवानों को निशाना बनाया जा रहा है जिन पर माज़ी में दहश्तगर्दी के इल्ज़ामात आइद करते हुए एक बार फिर उन्हें अज़ीयतों के अल-मनाक दूर से गुज़ारा जाने वाला है।

इस मर्तबा एसा लगता है कि रियासत ख़ासकर हैदराबाद के नौजवानों को पूछगिछ के लिए तलब करने के बाद रहा करदिया जाएगा और एसा किया भी जा रहा है मगर फिर कुछ अर्सा बाद दूसरी रियासतों के मुस्लिम नौजवानों को माख़ूज़ करते हुए उन्हें पनाह देने के इल्ज़ाम में चंद हैदराबादी नौजवानों को गिरफ़्तार करलिया जाएगा।

तहक़ीक़ाती एजंसियां जिस नहज पर काम कररही हैं इस मुस्लिम बिरादरी ये सोचने पर मजबूर है कि कहीं हमारी तहक़ीक़ाती एजंसियां, हुकूमत से इस बात का तो इंतिक़ाम नहीं ले रही हैं कि मक्का मस्जिद में बम धमाका के सिलसिले में जिन मुस्लिम नौजवानों को अदालत से बरी होजाने पर माज़रत ख़्वाही करते हुए उन्हें मुआवज़ा अदा किया गया जिस के बाइस उन के दिखावे के हौसलों को ठेस पहुंची है। ज़रूरत इस बात की है कि सहीह सिम्त तहकीकात करते हुए असल ख़ातियों को पकड़ कर उन्हें क़रार वाक़ई सज़ा-ए-दी जाये और एक ही आला सतही एजंसी के ज़रीये जामि अंदाज़ में तहकीकात करवाई जाये और इस में रियासती पुलीस एजंसियों की मुदाख़िलत को ख़त्म किया जाये जो गैर ज़रूरी तौर पर यकतरफ़ा अंदाज़ में नौजवानों को तलब करते हुए मुस्लिम बिरादरी में ख़ौफ़-ओ-हिरास पैदा कररहे हैं।

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