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सीबीआइ के साबिक़ जज मुलजिम बने

रांची 8 मई : झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन(जेपीएससी) घोटाले में सीबीआइ के एक साबिक़ जज को मुलजिम बनाया गया है। मामला जेपीएससी की जानिब से डॉक्टरों की तकरीरी से जुड़ा है। वाकिया के समय सीबीआइ के साबिक़ जज जेपीएससी में रुकन थे। फिलहाल व

रांची 8 मई : झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन(जेपीएससी) घोटाले में सीबीआइ के एक साबिक़ जज को मुलजिम बनाया गया है। मामला जेपीएससी की जानिब से डॉक्टरों की तकरीरी से जुड़ा है। वाकिया के समय सीबीआइ के साबिक़ जज जेपीएससी में रुकन थे। फिलहाल वह ला यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के ओहदे पर काम में हैं।

हाइकोर्ट ने सीबीआइ को जेपीएससी के 12 मामलात की जांच सौंपी थी। सीबीआइ ने इसमें से चार में बाकायदा सनाह दर्ज की थी, जबकि आठ मुकदमात में इब्तेदाई तहकीकात शुरू की थी। डॉक्टर तकरीरी में गड़बड़ी की इब्तेदाई तहकीकात के बाद सीबीआइ (एसीबी) ने इस सिलसिले में बाकायदा सनाह दर्ज की है। इसमें जेपीएससी के मौजूदा सदर दिलीप प्रसाद, एक्सिक्यूटीव सदर शरीक रुकन आलोक सेन गुप्ता, इम्तेहान कंट्रोलर एलिस उषा रानी सिंह, मेसर्स आइकान के पार्टनर राजेश नाथ शाहदेव और डॉ नलिनी कुमारी को मुलजिम बनाया गया है। आलोक सेन गुप्ता अदालती सर्विस के अफसर थे। उन्होंने सीबीआइ के खुसूसी जज के ओहदे पर काम करते हुए चारा घोटाले के कई मामलों में फैसला सुनाया था। वह गवर्नर सेक्रेट्रीयेट में ओएसडी के ओहदे पर भी काम कर चुके हैं। डॉक्टर तकरीरी में सीबीआइ ने उन पर अपने ओहदे का गलत इस्तेमाल करने का इलज़ाम लगाया है। सीबीआइ ने एफआईआर में नियमों का खिलाफवर्जी कर नलिनी को मुक़र्रर करने का इलज़ाम लगाया है।

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