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सीबीआई की रिपोर्ट में खुलासा: सरकारी एजेंसियों ने मुखबिरों को आतंकवादी बना दिया

दिल्ली के अपने घर में इरशाद अपनी पत्नी के साथ। (फोटो क्रेडिट- इंडियन एक्सप्रेस)

नई दिल्ली: आतंकवाद के आरोप तकरीबन एक दशक बाद बरी हुए बिहार के रहने वाले इरशाद अली ने कहा है कि केंद्र सरकारी एजेंसियों ने दो निर्दोष लोगों का जीवन बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने यह साबित कर दिया कि हमें ग़लत तरीके से फंसाया गया था।

गुरुवार को एक स्थानीय निचली अदालत ने इरशाद अली और मोरीफ क़मर को आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया था। इनके खिलाफ आतंकी साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि ये दोनों एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के सदस्य है। उसके बाद इन दोनों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत धाराएं लगाई गई थी। दूसरी तरफ सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इरशाद अली और मोरीफ क़मर को मुखबिर से आतंकवादी बनाया गया।

अदालत से बरी होने के बाद अली ने कहा कि सीबीआई ने साबित कर दिया कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था। सीबीआई और दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ दोनों एक ही सरकार से संबंधित है, लेकिन सरकार ने पूरे मामले में कुछ नहीं किया।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि इन दोनों को मुकरबा चौक पर 9 फरवरी 2006 में हथियार और गोला बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया था, जहां से वे जम्मू जाने वाले थे। इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। उसके बाद अदालत ने इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया में था। सीबीआई ने 11 नवम्बर को अपनी क्लोज़र रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया कि ये दोनों दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ और इंटेलीजेंस ब्यूरो के लिए मुखबिरी किया करते थे। इन दोनों को पुलिस ने ग़लत तरीके से फंसाया था। उसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रितेश सिंह ने दोनों का दोषमुक्त करार देकर बरी कर दिया था।

अली के अनुसार उनकी गिरफ्तारी के एक साल के भीतर मां की मृत्यु हो गई। पिता की भी इस साल के शुरू में गुजर गए। जब वह जेल में बंद थें तो उसकी छह माह की बच्ची की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं ने उनको तोड़ दिया। परिवार बर्बाद हो गया। उन्होंने बताया कि मुझे 12 दिसंबर, 2005 को पुलिस ने धौला कुआं कार्यालय में बुलाया, जहां दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के लोग मौजूद लोग थे। उसके बाद मेरे आखों पर पट्टी बांधकर एक कार में डाल दिया गया। इससे मैं चौंका। इस मामले पर उच्च न्यायालय नेसीबीआई जांच का निर्देश दिया। उसने अपनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश करते हुए कहा कि ये दोनों सीबीआई और दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के लिए मुख़बिरी किया करते थे और इन्हें ग़लत तरीके से फंसाया गया।

 

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