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सीमा पर रहने वाले लोगों ने कहा सभी बेवकूफ बना रहे हैं

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उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव का माहौल बना हुआ है। भारत सरकार ने पंजाब से सटी नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर तक के गांवों को खाली करने का आदेश दिया है। नियंत्रण रेखा आसपास के गांवों से पलायन शुरू हो चुका है पर वहां के लोगों को किन दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है उसी को लेकर बीबीसी रिपोर्टर विनीत खरे ने एक रिपोर्ट लिखा है। उन्होंने लिखा है कि बॉर्डर से सटे इलाकों के कई गांवों के किसानों में डर और अनिश्चितता के साथ-साथ गुस्सा है। लोगों का सवाल है कि उन्हें इस तरह कब रहना पड़ेगा। नियंत्रण रेखा से सटे कुछ गांव तो पूरी तरह खाली तो करा दिया गया है पर कुछ लोग अभी रात में घर छोड़ देते हैं और सुबह घर वापस लौट आते हैं।

भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गिलपन गांव के सालविंदर सिंह बेहद ग़ुस्से में कहते हैं कि सरकार ने गांव खाली करने को तो बोल दिया है, लेकिन हमारे लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया है। हम अपने माल-मवेशी लेकर कहां जाएं। सालविंदर सिंह कहते है कि हमने 1971 की जंग देखी है। पहले गांवों में आर्मी आती है गांव की घेरा बंदी होती है। यहां ऐसा कोई माहौल दिखाई नहीं दे रहा है। ये सभी लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।

वहीं तरण तारण ज़िले के थेकला गांव के किसान गुरदीप सिंह कहते हैं कि उनके खेत नियंत्रण रेखा से बिलकुल सटे हुए हैं, जहां सरकार ने बाड़ लगाई है। कुछ किसानों के खेत उस बाड़ के पार भी हैं। उड़ी हमले के बाद से किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हमले से पहले बाड़ के गेट खोल दिए जाते थे जिससे किसान खेत पर जाकर सिंचाई का काम किया करता था। वहीं दूसरे किसान कहते हैं कि हम शाम होते-होते गांव खाली कर देते हैं, लेकिन सुबह फिर से खेतों और घर पर आ जाते हैं।

पंजाब के ही बैंका गांव में सरकार ने रिलीफ़ कैंप लगाया है। वमिडिल स्कूल में बनाए गए इस रिलीफ़ कैंप में 30-35 परिवार के बच्चे और महिलाएं ठहरी हुईं हैं। रिलीफ़ कैंप की देखरेख में लगीं एक हिंदी की शिक्षक सोना देवी का कहना है कि भारत-पाकिस्तान के तनाव के बाद इस स्कूल को शरणार्थी कैंप बनाया गया है। कैंप में रह रही एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि हमें अधिकारियों ने आकर कहा कि यहां से दस किलोमीटर दूर कहीं चले जाएं। हमारा आस-पास कोई रिश्तेदार नहीं है, इसलिए हम इस कैंप में रुके हैं।

रिलीफ कैंप के इंचार्ज सुखा सिंह का कहना है कि इस ज़िले में 23 रिलीफ़ कैंप चलाए जा रहे हैं। सभी कैपों में स्वास्थ्य से लेकर खाने-पीने तक का पूरा इंतजाम किया गया है। इस रिलीफ कैंप में डॉक्टरों की भी सेवा लगाई गई है। उनमें कुछ का कहना है कि यहां लोगों में तनाव की शिकायत है। थकान की वजह से लोगों को बुखार आ रहा है।

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