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सीरिया का समर्थन करने के लिए अमेरिका ने रुस के खिलाफ़ उठाया बड़ा कदम, किया यह ऐलान!

सीरिया में रासायनिक हमले के बाद गुस्साए अमरीका ने राष्ट्रपति बशर अल असद सरकार को चेताने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर गत शनिवार संयुक्त रूप से सैन्य कार्रवाई दौरान ताबड़तोड़ हवाई हमले करते आगाह किया कि वह और उसके सहयोगी देश सीरिया की इस हरकत को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इन हमलों के बाद सीरिया के सहयोगी देश रूस ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई व अमरीका को चेतावनी देते हुए परिणाम भुगतने की बात कह डाली। सीरिया के हक में रूस के खुल कर सामने आने के बाद अमरीका ने रूस को भी झटका देने की तैयारी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूसी विरोध को लेकर ट्रंप प्रशासन बड़ा कदम उठा सकता है।

सीरिया सरकार को समर्थन देने को लिए रूस को दंडित करने के लिए अमरीका मास्को पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर चुका है। इन प्रतिबंधों द्वारा उन कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा जिन्होंने सीरिया सरकार को ये रासायनिक हथियार मुहैया कराए हैं। अमरीका ने कहा है कि वह सीरिया पर दबाव बनाए रखेगा और उसे रासायनिक हथियारों का प्रयोग नहीं करने देगा।

संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निक्की हेली ने भी ऐसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की पुष्टि की है। सीरिया के रासायनिक हथियारों से जुड़ी सुविधाओं के खिलाफ अमरीकी नेतृत्व वाले हवाई हमलों के तुरंत बाद आगामी प्रतिबंध इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका सीरिया सरकार ही नहीं बल्कि उसके संरक्षक रूस और ईरान को भी जिम्मेदार मानता है।

ट्रंप ने कसम खाई है कि सीरिया का समर्थन करने वाले देशों को भी उसे रासायनिक हथियार मुहैया कराने की बड़ी कीमत चुकानी होगी और यदि उसने दोबारा रासायनिक हमला किया तो प्रतिक्रिया के लिए अमरीका तैयार है।

निक्की हेली ने एक इंटरव्यू में कहा कि आप जल्द ही रूस पर लगने वाले प्रतिबंधों को देखेंगे । उन्होंने कहा कि अमरीका की कोशिश होगी कि वह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर दुनिया को सख्त संदेश दे।

हेली ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद की तरफ संकेत करते हुए कहा कि हमारा मकसद असद को बाहर करना कभी भी नहीं रहा है, बल्कि हम संयुक्त राष्ट्र की अध्यक्षता में राजनीतिक प्रक्रिया द्वारा इस विवाद को सुलझाना चाहते हैं।

हम युद्ध नहीं चाहते हैं। वहीं सीरिया हमले पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने समर्थन जताया है, जबकि जर्मनी के विपक्षी दलों ने हवाई हमलों पर आलोचनात्मक रुख अपनाया है। हालांकि सत्ताधारी सीडीयू, सीएसयू और एसपीडी ने मर्केल के रुख के प्रति समर्थन जताया है।

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