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सी आई एस एफ़ दहश्तगर्दी से निमटने ख़ुद को तैयार करे:राजनाथ सिंह

हैदराबाद 09 सितंबर: मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला राजनाथ सिंह ने सी आई एस एफ़ के ओहदेदारों पर-ज़ोर दिया कि वो दहश्तगर्दी तख़रीबकारी वग़ैरा की नई शक्लों से पैदा होने वाले चैलेंजों से मूसिर अंदाज़ में निमटने के लिए ख़ुद को तैयार करें।

उन्होंने बदलते हुए सिक्योरिटी मंज़रे नामा खासतौर पर वी आई पी सिक्योरिटी डीज़ासटर मैनेजमेंट सरकारी इमारतों की सिक्योरिटी और हवा बाज़ी सिक्योरिटी के मुआमलात में सी आई एस एफ़ का रोल बहुत बढ़ गया है।

यहां नेशनल इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी एकेडेमी में असिस्टेंट कमांडेंटस के 29 वें बयाच रास्त तक़र्रुर पाने वाले असिस्टेंट कमांडेंटस के 9 वें बयाच और सब इंस्पेक्टरस के 41 वें बयाच की पासिंग आउट परेड की सलामी लेने के बाद ख़िताब करते हुए वज़ीर-ए-दाख़िला ने कहा कि सी आई एस एफ़ को जराइम के नए इलाक़ों जैसे साइबर क्राइम्स से निमटने में अपनी सलाहीयतों में बेहतरी पैदा करने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि दुनिया आज डीजीटल होती जा रही है एसे में सी आई एस एफ़ को भी अपनी सलाहीयतों में बेहतरी पैदा करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि हुकूमत ने सी आई एस एफ़ की अददी ताक़त को 1.36 लाख से बढ़ा कर दो लाख करने के लिए इक़दामात का आग़ाज़ कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ज़रूरत इस बात की हैके सी आई एस एफ़ में ख़वातीन के तनासुब को बढ़ाया जाये। ये तनासुब एक तिहाई तक करने की ज़रूरत है। उन्होंने मतला किया के सी आई एस एफ़ बाएं बाज़ू की तख़रीबकारी से मुतास्सिरा इलाक़ों में तरीकाती सरगर्मीयों में भी सरगर्म है।

वज़ीर-ए-दाख़िला ने कहा कि सिक्योरिटी फोर्सेस के बेहतर इस्तेमाल में ख़ुसूसी सिक्योरिटी ऑडिट की ज़रूरत है। फ़िलहाल सी आई एस एफ़ में ख़वातीन का तनासुब 5.04 फ़ीसद है।

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