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सी डब्लू जी स्क़ाम : हाईकोर्ट में स्विस कंपनी की अर्ज़दाशत मुस्तर्द

दिल्ली हाइकोर्ट ने कॉमनवेल्थ गेम्स स्क़ाम में मुबय्यना तौर पर मुलव्वस स्विटज़रलैंड की एक कंपनी स्विस टाइमिंग की इस अर्ज़दाशत को मुस्तर्द कर दिया जिसमें कंपनी ने एक ज़ीरीं अदालत के ज़रीया इस केख़िलाफ़ की जाने वाली मुम्किना कार्रवाई प

दिल्ली हाइकोर्ट ने कॉमनवेल्थ गेम्स स्क़ाम में मुबय्यना तौर पर मुलव्वस स्विटज़रलैंड की एक कंपनी स्विस टाइमिंग की इस अर्ज़दाशत को मुस्तर्द कर दिया जिसमें कंपनी ने एक ज़ीरीं अदालत के ज़रीया इस केख़िलाफ़ की जाने वाली मुम्किना कार्रवाई पर अलतवा की दरख़ास्त की थी।

मज़कूरा कंपनी को सी डब्लू जी स्क़ाम में मुबय्यना तौर पर मुलव्वस पाया गया था और सी बी आई जज ने कंपनी के नाम समन जारी करने की इजाज़त दी थी ताकि स्क़ाम की समाअत के दौरान कंपनी के नुमाइंदे भी मौजूद रहें, लेकिन हाइकोर्ट के जस्टिस गुप्ता ने ये कह कर कंपनी की अर्ज़दाश्त को मुस्तर्द कर दिया था कि सी बी आई ने जिस तरह किसी समुंद्र पार कंपनी को समन जारी किए जाते हैं, इस तरह समन की इजराई में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।

सीनीयर वकील अमीत देसाई जो MNC की नुमाइंदगी करते हैं, ने क़ब्लअज़ीं एक समाअत के दौरान कहा था कि इस मामले में सी बी आई ने अदालत को गुमराह किया है क्योंकि कोई भी क़ानूनी कार्रवाई जैसे गिरफ़्तारी वारंट या इमलाक को क़ुर्क़ कर लेने जैसे मुआमलात फ़िलवक़्त क़ानून के बरअक्स होते क्योंकि समन की इजराई ही सिरे से अंजाम नहीं दी गई थी जैसा कि CrPc और बैन-उल-अक़वामी मुआहिदों के तहत होता है।

उन्होंने बैन-उल-अक़वामी मुआहिदों का हवाला देते हुए कहा था कि समुंद्र पार ममालिक में रहने वाले ख़ाती को समन रवाना करने के लिए इसी मुताल्लिक़ा मुल़्क की अदालतों , जजों और मजिस्ट्रेटस को समन भेजने पड़ते हैं जबकि दीगर एजेंसीयों को समन रवाना करने से क़ानूनी तक़ाज़े पूरे नहीं होते।

सुरेश कलमाडी पर ये इल्ज़ामात आइद हैं कि उन्हों गै़रक़ानूनी तौर पर बदउनवानीयों में मुलव्वस होते हुए स्विटज़रलैंड की कंपनी स्विस टाइमिंग को कौन्ट्रैक्ट्स दिए थे जिससे हिंदूस्तान के खज़ाने को 90 करोड़ रुपये का नुक़्सान बर्दाश्त करना पड़ा था।

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