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सी बी आई से कोई नोटिस नहीं मिली : वज़ीर आबकारी -ओ-नशा बंदी (Excise & Drug Minister)

रियासती वज़ीर नशा बन्दी-ओ-आबकारी मिस्टर एम वेंकट रमना ने वाज़िह (स्पष्ट) तौर पर कहा है कि उन्हें सी बी आई के ज़रीया किसी भी नोविय्यत (तरह) की कोई नोटिस अभी तक वसूल नहीं हुई है । उन्हों ने इस बात पर गहरे दुख और अफ़सोस का इज़हार किया कि

रियासती वज़ीर नशा बन्दी-ओ-आबकारी मिस्टर एम वेंकट रमना ने वाज़िह (स्पष्ट) तौर पर कहा है कि उन्हें सी बी आई के ज़रीया किसी भी नोविय्यत (तरह) की कोई नोटिस अभी तक वसूल नहीं हुई है । उन्हों ने इस बात पर गहरे दुख और अफ़सोस का इज़हार किया कि मीडिया उन के ताल्लुक़ से गैर ज़रूरी तौर पर बढ़ा चढ़ा कर ग़लत अंदाज़ में ना सिर्फ टेलीकास्ट कर रहा है बल्कि ग़लत अंदाज़ में खबरें शाए कर रहा है जब कि वो एक मौक़ा पर सी बी आई के रूबरू तहकीकात के लिये पेश हो चुके हैं और फिर एक बार कभी भी अगर सी बी आई उन्हें तलब करती है तो वो दुबारा सी बी आई के रूबरू पेश होने के लिये तय्यार रहने का इअदा किया कि वानपेक को आराज़ीयात अलाटमेंट करने के मुआमलों में कोई एक भी मामूली ग़लती सरज़द नहीं हुई है ।

अगर इन मुआमलतों में किसी भी नोविय्यत (तरह) की मुबय्यना बे क़ाईदगीयाँ होने के कोई सबूत हासिल हूँ तो वो किसी भी नोविय्यत (तरह) की सज़ा भुगतने के लिये तय्यार हैं । मिस्टर वेंकट रमना ने इस बात का इअदा किया कि साबिक़ चीफ मिनिस्टर डाक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी की ज़ेर क़ियादत काबीना में शामिल रहे वक़्त उन्हों ने किसी किस्म की बे क़ाईदगीयाँ वगैरह हरगिज़ नहीं किये हैं । लिहाज़ा उन्हें सी बी आई के रूबरू तलब किये जाने पर पेश होने के लिये किसी किस्म का ख़ौफ़ वो ख़तर नहीं है । लिहाज़ा जब कभी भी उन्हें सी बी आई की जानिब से किसी भी तहकीकात के लिये तलब किया जाएगा । वो फ़ौरी तौर पर सी बी आई के रूबरू पेश हो कर हक़ायक़ से वाक़िफ़ करवाने तय्यार हैं और किसी किस्म का पस-ओ-पेश(सोच-वीचार) सी बी आई से रुजू होने के लिये नहीं किया जाएगा ।

उन्हों ने उन के ताल्लुक़ से मीडिया के रोल पर एक मौक़ा पर ब्रहमी का इज़हार भी किया और कहा कि मीडिया यानी इलेक्ट्रोनिक-ओ-प्रिंट दोनों ही ज़िंदा शख़्स को मुर्दा के तौर पर पेश करने की कोशिश कर के साफ़ सुथरे किरदार को मस्ख करने और उन के वक़ार (प्रतिष्ठा) को मुतास्सिर करने जैसे इक़दामात किये जा रहे हैं । उन्हों ने मीडिया से पुरज़ोर ख्वाहिश की कि वो हरगिज़ राई को पहाड़ बनाकर पेश करने से एहतराज़ करें ताकि अवाम (जनता) में मीडिया के ताल्लुक़ से पाए जाने वाले भरोसा-ओ-एतिमाद (भरोसा) को बरक़रार रखा जा सके ।

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