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सुख राम , मुआवनीन को सुप्रीम कोर्ट से उबूरी ज़मानत

नई दिल्ली, १० जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज साबिक़ मर्कज़ी वज़ीर सुख राम को उबूरी ज़मानत अता करदी, जिन्हों ने 1993 टेलीकॉम केस में अपनी तीन साल की सज़ा भुगतने केलिए हफ़्ता को सुमावती अदालत के रूबरू ख़ुदसपुर्दगी इख़तियार कर ली थी।

नई दिल्ली, १० जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज साबिक़ मर्कज़ी वज़ीर सुख राम को उबूरी ज़मानत अता करदी, जिन्हों ने 1993 टेलीकॉम केस में अपनी तीन साल की सज़ा भुगतने केलिए हफ़्ता को सुमावती अदालत के रूबरू ख़ुदसपुर्दगी इख़तियार कर ली थी।

साबिक़ ब्यूरोक्रेट रोनो घोष और हैदराबाद के बिज़नसमैन पी रामा राव को भी फ़ाज़िल अदालत ने 16 जनवरी तक उबूरी ज़मानत अता कर दी, जब इस केस में बाक़ायदा ज़मानत केलिए उन की अर्ज़ीयां समाअत के लिए पेश हुईं।

जस्टिस पी सथा सीवम और जस्टिस जे चलमीशोर की बंच ने उन्हें ज़मानत अता करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट उन्हें राहत देने के लिए इस के इतमीनान के मुताबिक़ दरकार शर्त लागू करेगी। ये तीनों की ज़मानत अर्ज़ियों पर फ़ाज़िल अदालत ने सी बी आई को नोटिसें जारी भी किए और 16 जनवरी तक इस का जवाबतलब किया।

गुज़श्ता हफ़्ता को तिहाड़ जेल पहुंचने के बाद फ़ौरी बाद सुख राम को दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिटल के आई सी यू को मुंतक़िल करना पड़ा था क्योंकि डाक्टरों के मुताबिक़ उन की हालत बिगड़ने लगी थी। सीनीयर कौंसल गोपाल सुब्रामणियम, हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने तरतीबवार तीनों सज़ा याफ़तगान की पैरवी की और ब्यान किया कि वो गुज़श्ता 20 साल से ज़मानत पर हैं और उन के भाग जाने का अंदेशा नहीं है।

सुब्रामणियम ने सुख राम की पैरवी में कहा कि साबिक़ वज़ीर की उम्र 86 साल है और अदालत को उसे मल्हूज़ रखते हुए उन की ज़मानत का फ़ैसला करना चाहीए। इस बंच ने क़ब्लअज़ीं 5 जनवरी को दिल्ली हाइकोर्ट के इस हुक्मनामा के ख़िलाफ़ उन की अपीलों को क़बूल करने से इनकार कर दिया था जिस ने इस अस्क़ाम में इन की सज़ा दही और उन की सज़ाओं सुख राम और राव के लिए तीन साल और घोष के लिए दो साल की क़ैद को बरक़रार रखा है।

ये तीनों को ट्रायल कोर्ट ने 2002 में ख़ाती पाया था कि वो एक बद उनवान मुआमलत के ज़रीया सरकारी ख़ज़ाना को नुक़्सान के मूजिब बने जबकि एक टेलीकॉम आला की स्पलाई कौन्ट्रेक्ट हैदराबाद के एडवांस्ड रेडीयो मासटर्स को अता किया गया जिस ने घटिया मयार की अशीया डी ओ टी (महिकमा मुवासलात) को ऊंची शरह पर सरबराह किए थे।

नरसिम्हा राव हुकूमत में सुख राम 18 जनवरी 1993 और 16 मई 1996 के दरमयान वज़ीर-ए-मवासलात
थे।

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