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सुन्नते नबी (स्०अ०व्०) के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने की तलक़ीन

आदिलाबाद, ०९ फरवरी ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ ) समुंद्रों को स्याही , दरख़्तों को क़लम और ज़मीन को काग़ज़ बनाकर नबी करीम (स्०अ०व्०) की सीरत लिखा जाए तो भी नाकाफ़ी होगा । हमारे नबी (स०अ०व०) की सीरत ब्यान करना किसी के इख़तेयार में नहीं क्यों

आदिलाबाद, ०९ फरवरी ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ ) समुंद्रों को स्याही , दरख़्तों को क़लम और ज़मीन को काग़ज़ बनाकर नबी करीम (स्०अ०व्०) की सीरत लिखा जाए तो भी नाकाफ़ी होगा । हमारे नबी (स०अ०व०) की सीरत ब्यान करना किसी के इख़तेयार में नहीं क्योंकि अल्लाह ही जानता है मुहम्मद (स्०‍अ०व्०) का मर्तबा , इन ख़्यालात का इज़हार मौलाना सैयद सादिक़ नदवी ज़िला एवत महल ने अपने ख़िताब के दौरान किया ।

उन्हों ने नबी करीम (स०अ०व्०) के बताए हुए उसूलों को अपनाते हुए नबी करीम (स०अ०व्०)ई के मुबारक तरीक़ा पर ज़िंदगी गुज़ारने की ख़ाहिश की। मौलाना सैयद सादिक़ नदवी मुस्तक़र आदिलाबाद के उस्मानिया मस्जिद में मुनाक़िदा जलसा सीरत नबी(स्०अ०व्०) और इस्लाह मुआशरा में मेहमान ख़ुसूसी की हैसियत से शिरकत की ।

मौलाना मुहम्मद मुस्तफ़ा मज़ाहरी लातूर ने अपने ख़िताब में कहा नबी करीम (स्०अ०व्०) और हज़रत आयशा सिद्दिका ( र०अ०) का वाक़िया ब्यान करते हुए कहा कि दौड़ के दौरान हमारे नबी (स०अ‍०व0) ई पीछे रहते हुए अपनी हार को ज़ाहिर करते हुए हज़रत
आयशा सिद्दीका (र्०अ०)की कामयाबी पर इज़हार मुसर्रत करते थे ।

जिससे ये साबित होता है कि हम बाज़ी हार कर भी कामयाब होने वाले पर इज़हार ख़ुशी करें । मौलाना मुहम्मद मुस्तफ़ा मज़ाहरी ने कहा कि अल्लाह ताला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करने से पहले मुहम्मद (स्०अ०व्०) को अपना नबी बना चुके थे । इस मौक़ा पर उन्होंने नमाज़ों की पाबंदी करने और दरूद शरीफ़ कसरत से पढ़ने की हिदायत दी।

जलसा की कार्रवाई मौलाना इस्लाम उद्दीन क़ासिमी इमाम ख़तीब मस्जिद उस्मानिया ने चलाई । मुहम्मद इर्फ़ान मुतअल्लिम दार-उल-उलूम मुहम्मदिया हम्द पाक पेश किया जबकि मौलाना क़मर अल्ज़मां इमाम ख़तीब मस्जिद नगीना की तिलावत ए कलाम पाक से जलसा का आग़ाज़ हुआ ।

इस मौक़ा पर मस्जिद उस्मानिया के सुबह ही तालीम के तलबा-ए-ओ- तालिबात में मुहम्मद रिज़वान ने नमाज़ के अंदर और बाहर के फ़राइज़ ब्यान किए । शीरीं तबस्सुम ने वुज़ू और ग़ुसल के फ़राइज़ पर तफ़सीली रोशनी डाली । मुहम्मद एजाज़ ने अहादीस मुहम्मद तर्जुमा सुनाया ।

हम्द इमरान ने नाअतिया कलाम पेश किया । समीरा ने अक़्वाल ज़र्रीन , नमाज़ पर मिनहाज सुलताना , राबिया मकान मकान रोज़ा के फ़ज़ाइल , मकान तबस्सुम ने माँ पर , सनोबर नाज़ ने नात शरीफ़ , अमरीन तबस्सुम , ज़हरा तबस्सुम और शीमा अंजुम ने सवाल जवाब की शक्ल में देनी मालूमात पेश किए । रात देर गए जलसा का इख़तेताम अमल में आया ।

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