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सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले के बाद ही हज सब्सीडी पर ग़ौर

नई दिल्ली ! विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने आज कहाकि हज सब्सीडी खत्म‌ कर देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अहकाम पर हुकूमत सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले का इंतिज़ार कर रही है। इस के बाद ही वो कोई क़दम उठाएगी।

नई दिल्ली ! विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने आज कहाकि हज सब्सीडी खत्म‌ कर देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अहकाम पर हुकूमत सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले का इंतिज़ार कर रही है। इस के बाद ही वो कोई क़दम उठाएगी।

इस मौज़ू पर सुप्रीम कोर्ट के अहकाम मिलने के बाद हज सब्सीडी हज ख़त्म‌ करने के लिए ग़ौर किया जाएगा। 8 मई के अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हुकूमत को हिदायत दी है कि वो 10 साल की मुद्दत के दौरान आहिसता आहिसता हज सब्सीडी खत्म‌ करदे।

कहा गया है कि इस रक़म को मुस‌लमानों कि समाजी और तालीमी तरक़्क़ी के लिए फाइदामंद‌ तरीके से इस्तिमाल किया जा सकता है। एस एम कृष्णा से जब सवाल किया गया कि आया हुकूमत सुप्रीम कोर्ट के अहकाम के ख़िलाफ़ एक अपील दायर करने का मंसूबा रखती है, उन्हों ने कहाकि सुप्रीम कोर्ट ने टाइम परवरी हुक्म दिया है। हम अदालत के फाइनल हुकम का इंतिज़ार कर रहे हैं। जब एक बार हमें ये अहकाम मिल जाएं इस के बाद ही हम फ़ैसला करेंगे कि हमें अगला क़दम क्या उठाना होगा। हुकूमत इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दाख़िल करने पर भी ग़ौर कर सकती है।

ऑल इंडिया हज कमेटी की तक़रीब के मौके पर उन्हों ने अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहाकि अदालत का फ़ैसला अभि टाइमपरवरी है।
जस्टिस आफ़ताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई को शामिल‌ एक बंच ने क़ुरान मजीद की आयात का हवाला देते हुए सब्सीडी खत्म‌ करने को इंसाफ‌ क़रार दिया था। ये सब्सीडी 2011 में लगभग‌ 685 करोड़ की दी गई थी। बंच ने इस बात की निशानदेही की थी कि मुस‌लमानों की बडि तादाद को इस बात का इलम नहीं होगा कि हुकूमत उन के हज के लिए इतमीनान बख़श फ़ंड देती है।

मुमताज़ मुस्लिम क़ाइदीन की एक बड़ी तादाद ने सुप्रीम कोर्ट के अहकाम का खैर मक़दम(आवकार) किया था और कहा था कि हज सब्सीडी से मुस‌लमानों को कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है। इस सब्सीडी के तहत दिए जाने वाले फंड्स को मुस‌लमानों की तालीमी और मेयार-ए-ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए तय‌ किया जाना चाहीए।

ऑल इंडिया हज कमेटी की तक़रीब से बयान‌ करते हुए वज़ीर-ए-ख़ारजा एस एम कृष्णा ने कहाकि हज कमेटी की चेयर प्रसन मुहसिना क़दवाई ने उन्हें खबर दी कि पिछ्ले साल हज्ज में जाने वालों के सफ़र मुक़द्दस को शांतीशाली तरीके से और आसानी के साथ अंजाम दिया गया और हज कमेटियां अपना काम अछ्छी तरह कर‌ रही हैं।

इस साल हज 2012 के इंतेज़ामात करने वाले तमाम ओहदेदारों से भी मैं ख़ाहिश करूंगा कि वो हज्ज के सफ़र मुबारक को आसान और पुरसुकुन बनाने के लिए अपनी ख़िदमात को अछ्छा करें। हज मुक़द्दस एक मशक़्क़त का अमल है इस लिए आज़मीन को हर मुम्किना सहूलत देना ज़रूरी है। किसी भी मुक़ाम पर आज़मीन को कोई तकलीफ़ नहीं होनी चाहीए।

एस एम कृष्णा ने कहाकि हुकूमत ने जनवरी या फ़रव‌री में 2012 के लिए अपनी हज पोलिसी का फ़ैसला किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक केस के इलतीवा के सबब‌ इस में ताख़ीर हुई। 8 मई 2012 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ‌ से जारी किये गए वकती अहकाम के बाद ही हुकूमत ने अपनी हज 2012 पोलिसी को क़तईयत दिया है। जिस के बाद ही इस पोलिसी को जारी किया गया और ये पोलिसी 18 मई को जारी की गई है।

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