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सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच तय करेंगे, ” हिंदुत्व ” धर्म है या नहीं

नई दिल्ली: 1992 के महाराष्ट्र चुनाव में मनोहर जोशी ने कहा था कि वे महाराष्ट्र को पहला हिंदू राज्य बनाएंगे. उन के इस भड़काऊ बयान का मामला कोर्ट में पहुंचा और बाम्बे हाईकोर्ट ने 1995 में चुनाव रद्द कर दिया. यह मामला 20 साल पहले का है जब कोर्ट ने 1996 में फैसला दिया था कि हिंदूत्व ” वे ऑफ लाइफ ” यानी जीवन शैली है. कई बार हिन्दू संगठनों के तरफ से ये सुनने को मिलता है की हिंदूत्व धर्म नहीं जीवन शैली है.
इसको तय करने के लिये मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. सुप्रीम कोर्ट हिंदुत्व के नाम पर होने वाली राजनीति पर भी चर्चा करेगी, और साथ ही ये भी तय करेगी की इस आधार पर वोट मांगना कितना सही या गलत है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली 7 जजों की बेंच कर रही है.

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नेशनल दस्तक के अनुसार, हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. तब 1996 में कोर्ट ने फैसला दिया कि हिंदुत्व ” वे ऑफ लाइफ ” यानी जीवन शैली है. इसे हिंदू धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता. इसलिए हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगना रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के तहत करप्ट प्रैक्टिस नहीं है. तब से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीन चुनावी याचिकाएं लंबित हैं. अब 20 साल बाद इस पर सुनवाई शुरू हुई है. महाराष्ट्र चुनाव में मनोहर जोशी के भड़काऊ बयान पर बाम्बे हाईकोर्ट ने 1995 में चुनाव रद्द कर दिया था.

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